भगवान सूर्य की आराधना करने से पहले इन नियमों का करें पालन

भगवान सूर्य की आराधना जीवन में तेज और ओज को बढ़ाती है। इसीलिए वर्षों से लोग सूर्य देवता को जल चढ़ाते हैं। पुराणों के अनुसार भगवान सूर्य सभी ग्रहों के स्वामी और सबसे शक्तिशाली हैं। सूरज भगवान की भक्ति जीवन में शक्ति, पद, अधिकार, नाम, प्रतिष्ठा और बल देती हैं। मान्यताओं के अनुसार कुंडली में सूर्य ग्रह लाभकारी भाव में स्थित हो तो यह आपको राजसी लाभ प्राप्त कराता है।

भगवान सूर्य जल चढ़ाने की विधि

सूर्य उदय दे पहले उठ कर। अपने सभी दैनिक क्रियाएं व स्नान आदि करके। साफ वस्त्रों को धारण करें। मन में सूर्य भगवान का ध्यान रखते हुए सूर्य उदय होते ही जल अर्पित करें। सूर्य को जल चढ़ाने के लिए आपको तांबे का बर्तन, गुड़ के छोटे-छोटे टुकड़े, एक चुटकी चावल और रोली और साफ पानी की जरूरत होती है। इन सभी सामग्रियों को तांबे बर्तन में उपलब्ध पानी में डालें। फिर जल समाप्त होने तक मंत्रों का जाप करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें। सूर्य देव को जल चढ़ाने का सबसे अच्छा समय सूर्य उदय के समय का होता है।

सूर्य देवता मंत्र – भगवान सूर्य की आराधना

ओम मित्राय नमः
ओम रवाय नमः
ओम सूर्याय नमः
ओम भानवे नमः
ओम खगाय नमः
ओम पुष्ने नमः
ओम हिरण्य गर्भाय नमः
ओम मारीचये नमः
ओम आदित्याय नमः
ओम सावित्रे नमः
ओम अर्काय नमः
ओम भास्कराय नमः

इन नियमों का करें पालन
नहाना
सूर्य की पूजा करते समय साफ कपड़े पहनें।
उगते हुए सूर्य को सूर्यदेव की पूजा करें।
अपना चेहरा पूर्व या उगते सूरज की ओर रखें। ध्यान रखें कि सीधा सूर्य तरफ देखना आंखों के लिए हानिकारक हो सकता है। आप किरणों को देख सकते हैं।
सिर पर थोड़ा पानी छिड़कें।
गणेश और फिर सूर्यदेव की पूजा करें।
सूर्यदेव पर ध्यान केंद्रित करते हुए, जमीन पर पानी डालें। जल चढ़ाने का आदर्श समय सूर्याेदय के एक घंटे के भीतर है। डालते समय, अपने द्वारा पकड़े हुए बर्तन से पानी की धारा के माध्यम से सूर्य को देखें।
हो सके तो कोई फूल या कमल अर्पित करें।
माथे पर चंदन या लाल रंग का टीका लगाएं।
कुछ देर ध्यान करें, 5-7 मिनट।
अपने दाहिने हाथ की उंगलियों के साथ फर्श पर फैले पानी को अपने माथे पर स्पर्श कराएं और बाद में दोनों आंखों पर छूने से पहले यही प्रक्रिया दोहराएं।
अपने पैर पानी में न डालें।
अगर आप रविवार का व्रत कर रहे हैं तो फल खा सकते हैं।
सूर्य देवता को जल चढ़ाते समय सूर्य को सीधी आंखों से न देखें।
मंत्र का जाप करते समय आप जो जल प्रवाह बनाये रखें।
जल अर्पित करने के बाद, सूर्य देवता से प्रार्थना करें कि आपको जीवन में सही मार्ग दिखाएं और आपकी गलतियों को क्षमा करें।
उनसे प्रार्थना करें कि वे आपको स्वास्थ्य, धन और समृद्धि प्रदान करें।
अपनी भक्ति और विश्वास को शक्तिशाली बनाने के लिए उनसे प्रार्थना करें।
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