मोक्षदा एकादशी 2022 कब, जानें खाद्य पदार्थ जो हैं वर्जित!

मोक्षदा एकादशी 2022, जिसे एक महत्वपूर्ण एकादशी के रूप में माना जाता है। मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष के चंद्र महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाई जाती है। यह आमतौर पर नवंबर के अंतिम दिनों या दिसंबर के शुरूआती हफ्ते में आती है। मोक्षदा एकादशी को मौना एकादशी और बैकुंठ एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। एकादशी तिथि का शुभ प्रारंभ 03 दिसंबर 2022 शनिवार को सुबह 05 बजकर 39 मिनट पर हो रहा है।

मोक्षदा एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस एकादशी का पालन करने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो जाता है और मृत्यु के बाद मोक्ष या मुक्ति प्राप्त करता है। यह एकादशी उसी दिन गीता जयंती के रूप में भी मनाई जाती है जब भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद गीता का पवित्र उपदेश दिया था। यह भी माना जाता है कि मोक्षदा एकादशी 2022 पर भगवद गीता उपहार देना शुभ होता है क्योंकि भगवान कृष्ण लेने वाले और देने वाले दोनों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।

उपवास अनुष्ठान, क्या करें और क्या न करें

यह व्रत सभी एकादशियों में सबसे शुभ माना जाता है। इसलिए सभी के लिए एकादशी का पूर्ण उपवास करने की सलाह दी जाती है। हालाँकि, जो लोग पर्ण उपवास नहीं कर सकते, वे एक बार भोजन करके, दोपहर में या शाम को एकादशी व्रत का पालन कर सकते हैं। यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि इस व्रत को करते समय कौन से खाद्य पदार्थ खाने की अनुमति है और कौन सी वर्जित मानी गई है।

मोक्षदा एकादशी 2022 पर क्या खाएं

ताजे और सूखे फल, सब्जियां, मेवे और अखरोट का तेल, दूध, नारियल, आलू, शकरकंद, जैतून, चीनी, सेंधा नमक, काली मिर्च, अदरक, आदि का सेवने किया जा सकता है।

खाद्य पदार्थ जो हैं वर्जित

मांसाहारी भोजन (मांस, मछली, अंडा, आदि), मशरूम, पेय पदार्थ (चाय, कॉफी, कोला और अन्य ऊर्जा पेय) सभी प्रकार के अनाज, प्याज, मटर, बीन्स, इमली, कस्टर्ड, तिल , सरसों, नमक, बेकिंग सोडा, बेकिंग पाउडर, हींग, लौंग, मेथी, इलायची, जायफल, सौंफ, नशीला पदार्थ (तंबाकू और शराब), आदि का सेवन न करें।

मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से लाभ

आयुर्वेद का हवाला है कि भोजन का अत्यधिक सेवन सुस्ती और बीमारियों का कारण है। व्रत (उपवास) करने से हम पेट को साफ कर सकते हैं और पाचन तंत्र को फिर से जीवंत कर सकते हैं।

एकादशी के दिन उपवास करने से हमारे पाचन तंत्र को लाभ हो सकता है क्योंकि इन दिनों वायुमंडलीय दबाव कम होगा। यह पाचन तंत्र को साफ करने में भी सहायता करता है, जो आमतौर पर गलत खान-पान के कारण खराब हो जाता है।

द्विमासिक एकादशी व्रत के स्वास्थ्य लाभों में कोलेस्ट्रॉल कम करना, विषाक्त पदार्थों को खत्म करना, यकृत और गुर्दे के कामकाज को फिर से जीवंत करना और रक्त को शुद्ध करना शामिल है।