एनजाइना की समस्या से हो सकता है हार्ट अटैक का खतरा!

एनजाइना की समस्या (Angina problem) तब पैदा होती जब हृदय की मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह सही नहीं होता है। इस समस्या में हृदय की जरूरत के अनुसार पर्याप्त खून उस तक नहीं पहुंच पाता है। जिसकी वजह से सीने में दर्द, बेचैनी जैसे लक्षण पैदा होते हैं। इस समस्या से परेशान व्यक्ति में तेज दर्द व छाती में भारीपन महसूस होता है। कभी-कभी ये दर्द बाएं बाजू में, गर्दन, जबड़े व दांतों में भी हो सकता है। एनजाइना से पीड़ित व्यक्ति में सांस की तकलीफ, उल्टी, अधिक पसीना आना जैसी समस्या देखी जाती है। कुछ लोगों में दर्द दोनों हाथों में व कंधों में महसूस हो सकता है।

एनजाइना की समस्या का बढ़ना

सही समय पर एनजाइना की समस्या पकड़ में न आने के कारण बढ़ सकती है। अधिकतर लोग इसे समय पर नहीं पहचान पाते हैं। इसके शुरूआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है। जैसे कि अत्यधिक थकान या व्यायाम करने में परेशानी होना। छोट-छोटे काम करने में परेशानी अनुभव होना। घर की सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत होना। इसके साथ सोते समय सीने में दर्द का अनुभव होना। ऐसे लक्षणों के सामने आने पर सावधान हो जाना चाहिए। कुछ पीड़ितों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। ये स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है। ऐसे लोगों में कोरोनरी धमनियों का पूरी तरह से खराब हो जाने का खतरा रहता है। इस बीमारी का नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। इससे पीड़ित व्यक्ति में हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

कारण

हमारे हृदय को रक्त पहुंचाने का काम कोरोनरी धमनियां करती हैं। एनजाइना का मुख्य कारण संकुचित कोरोनरी धमनियां होती हैं। जिसकी वजह से रक्त की आपूर्ति सही तरह से नहीं हो पाती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल अकसर बढ़ा हुआ होता है। कोलेस्ट्रॉल के बढ़ी मात्रा कोरोनरी धमनी को सकरा कर देती है। जिससे रक्त आपूर्ति में रुकावट पैदा होती है। फलस्वरूप एनजाइना के लक्षण उभरते हैं। उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) की वजह से भी कई बार हृदय की मांसपेशियों पर बहुत दबाव पड़ता है। जिसकी वजह से दर्द उभर सकता है।

क्या एनजाइना से जान का खतरा होता है

एनजाइना पीड़ित व्यक्ति अपनी दवाओं, संतुलित आहार और व्यायाम से इसे नियंत्रित कर सकता है। इस बीमारी की रोकथाम का मकसद दिल क दौरे का खतरा कम करना होता है। अगर कोरोनरी धमनियों में से एक पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाती है, तो खतरा बढ़ जाता है। अधिकतर मामलों में हृदय की मांसपेशियों में रक्त के प्रवाह में कमी से दिल का दौरा नहीं पड़ता है। लेकिन इससे हृदय के काम करने में बाधा जरूर आती है। जो आपकी जीवनशैली का प्रभावित कर सकती है। इसलिए एनजाइना से पीड़ित व्यक्ति को अपने डॉक्टर से लगातार संपर्क में रहना चहिए। अपने आहार को संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर रखना चाहिए। इसके साथ-साथ विशेषज्ञ द्वारा सुझाए व्यायामों को जरूर करना चाहिए। ऐसा करके आप एनजाइना की परेशानी को बढ़ने से रोक सकते हैं।

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