मल में हो ये बदलाव तो हो जाएं सावधान!

मल आमतौर पर हल्के भूरे रंग का होता है, व मल की मात्रा प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न हो सकती है। जब मल में अचानक से बड़े परिवर्तन होते हैं, तो इसका सीधा मतलब यह हो सकता है कि व्यक्ति में जीआई पथ या शरीर को प्रभावित करने वाली बीमारी हो। कुछ मामलों में मल के रंग या बनावट में परिवर्तन सामान्य हो सकते हैं, लेकिन अधिकांश परिवर्तनों की जांच किया जाना जरूरी होता है।

असामान्य रंग का मल, दस्त के कारण भी हो सकता है। आंत में रक्तस्राव, अग्न्याशय, या यकृत रोग और कुछ दवाओं के कारण भी मल का रंग भिन्न हो सकता है।

ग्रीन स्टूल सामान्य स्टूल परिवर्तन है। यह मल में पित्त वर्णक के कारण हो सकता है क्योंकि दस्त भोजन को बहुत तेजी से आंत में ले जाता है इसलिए आंतों के रसायन और बैक्टीरिया पित्त वर्णक को उसके सामान्य भूरे रंग में नहीं तोड़ पाते हैं, या हरा रंग कुछ खाद्य पदार्थों की वजह से हो सकता है हरी, पत्तेदार सब्जियां या कोई अन्य हरे रंग का भोजन।

लाल या काला रंग यह पाचन तंत्र में रक्तस्राव का संकेत हो सकता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।


तैरते हुए मल का क्या कारण है?
अधिकांश मल तैरते हैं क्योंकि इसमें अत्यधिक मात्रा में गैस होती है। यह सामान्य है और इसमें कोई चिंता करने की बात नहीं होती है। इसमें कोई कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं होती है, और अक्सर यह सहज रूप से हल हो जाता है। आंतों में गैस के बढ़ने की कोई भी स्थिति सैद्धांतिक रूप से फ्लोटिंग स्टूल का कारण बन सकती है, विशेष रूप से ऐसी स्थितियों में जहां लैक्टोज की समस्या, सीलिएक रोग, सिस्टिक फाइब्रोसिस और लघु आंत्र सिंड्रोम जैसी परेशानियां होती हैं।

मल रंग या बनावट में बदलाव के बारे कब बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
काले, लाल या मैरून मल दिखने मतलब यह हो सकता है कि रक्तस्राव की संभावना है, और इसके लिए तत्काल जांच और उपचार की आवश्यकता होती है, कई मरीजों में अधिकांश रंग परिवर्तन आपातकालीन नहीं होते हैं। डाॅक्टर के लिए अन्य लक्षणों को भी जानना जरूरी होता है, उनके बाद ही डाॅक्टर किसी नतीजे पर पहुंचते हैं।

जो महिलाएं गर्भवती होती हैं उनमें कई बार मल में परिवर्तन देखा जाता है, गर्भवती महिलाओं में कई बार आईरन और विटामिन की खुराक के कारण मल काला हो सकता है। आईरन मल को हरा भी कर सकता है। जैसे-जैसे गर्भाशय बढ़ता है और श्रोणि के भीतर दबाव बढ़ता है, कब्ज हो सकता है और बवासीर विकसित हो सकता है और मल में रक्त का कारण बन सकता है। ऐसे में बिना देर किए डाॅक्टर से सलाह और जांच बहुत जरूरी हो जाती है।

यदि कोई अंतर्निहित समस्या नहीं है, तो मल के रंग परिवर्तन अक्सर आहार में परिवर्तन के कारण होते हैं और कुछ दिनों में हल हो जाते हैं। अगर लंबे समय तक समस्या हल नहीं होती है तो अपने डाॅक्टर से संपर्क करें और सभी जरूरी जांच करवाएं।

अगर आपको मल के रंग में परिवर्तन के साथ उल्टी, दस्त, बुखार या पेट दर्द जैसे लक्षण हैं तो भी बिना देर किए डाॅक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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