बिना डॉक्टर से पूछे करते हैं पैरासिटामोल का प्रयोग तो हो जाएं सचेत!

सांझ संजोली । शुचिता मिश्रा

आजकल डेंगू, मलेरिया और वायरल से लेकर तमाम बीमारियों का प्रकोप चल रहा है। कुछ लोगों की आदत होती है कि वे जरा सा बुखार आते ही या शरीर में थोड़ा दर्द होते ही पैरासिटामोल का प्रयोग कर लेते है। लेकिन ऐसा करना आपके लिए घातक सिद्ध हो सकता है। चेस्ट कंसल्टेंट व अस्थमा भवन जयपुर की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. निष्ठा सिंह का कहना है कि कुछ रिसर्च में सामने आया है कि जो लोग पैरासीटामोल ज्यादा खाते हैं, उन्हें अस्थमा की बीमारी का खतरा अधिक होता है। हालांकि अभी इसकी पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन फिर भी इसका कम से कम प्रयोग करना बेहतर है। बगैर चिकित्सक की सलाह के पैरासीटामोल कभी न लें।

बता दें कि भारत में ये बीमारी तेजी से अपने पैर पसार रही है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट की मानें तो भारत में करीब डेढ़ से दो करोड़ लोग अस्थमा की परेशानी से पीड़ित हैं। वहीं इन दिनों छाए स्मॉग ने इस बीमारी के खतरे को और ज्यादा बढ़ा दिया है। अस्थमा से जुड़े तमाम पहलुओं को जानने के लिए सांझ संजोली संवाददाता ने डॉ. निष्ठा सिंह से विस्तार से बातचीत की। जानते हैं इस बीमारी से जुड़ी तमाम अहम बातें —

पैरासिटामोल का प्रयोग डॉक्टर की सलाह से ही करें

पैरासिटामोल का प्रयोग डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। किसी भी दवाई का बेतरतीबी इस्तेमाल नुकसान पहुंचाता है। क्या आप जानते हैं कि अस्थमा की परेशानी किसी भी उम्र में हो सकती है। इसके तमाम कारण हैं। इन कारणों में प्रदूषण एक बड़ा कारण है। यही वजह है कि इन दिनों छाए स्मॉग ने न सिर्फ अस्थमा रोगियों के लिए परेशानी बढ़ायी है, बल्कि इसके कारण तमाम लोगों के लिए अस्थमा होने का खतरा भी बढ़ गया है।

जानिए प्रमुख कारण

अस्थमा के कारणों में आउटडोर और इनडोर प्रदूषण, पुरानी डस्ट, परफ्यूम, छौंक का धुआं, जानवरों के फर, धू्म्रपान, तंबाकू का अधिक सेवन, दिवाली के पटाखों का धुआं, तेज हवा, अचानक मौसम में बदलाव व आनुवांशिकता आदि। यदि कोई अस्थमा से पीड़ित है तो उसे इन स्थितियों से बचने की जरूरत है, वर्ना अस्थमा अटैक बढ़ सकते हैं।

ये लक्षण आते सामने

अस्थमा में सांस नलियां सिकुड़ जाती हैं। समय समय पर कुछ कारणों से व्यक्ति को अचानक अटैक पड़ता है जिसके कारण उसे सांस लेने में परेशानी होती है। ऐसे में सांस फूलना, घरघराहट या सीटी की आवाज आना, सीने में जकड़न महसूस होना, बेचैनी महसूस करना, खांसी, सिर में भारीपन, थकावट महसूस करना आदि लक्षण सामने आते हैं। स्थिति को सामान्य बनाने के लिए मरीज को फौरन इन्हेलर का सहारा लेना पड़ता है। यदि समय रहते इन्हेलर न मिले तो समस्या गंभीर भी हो सकती है।

पुष्टि के लिए विशेषज्ञ कराते ये जांचें

सांस संबंधी किसी भी परेशानी पर फौरन विशेषज्ञ से संपर्क करें ताकि बीमारी का पता चल सके। अस्थमा के लिए विशेषज्ञ स्किन प्रिक टेस्ट व ब्लड टेस्ट कराकर इसकी पुष्टि करते हैं।

इलाज के साथ सावधानी जरूरी

अस्थमा की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं होती, लेकिन यदि सावधानी बरतकर मरीज इसके कारणों से बचाव करे तो काफी फायदा हो सकता है। इलाज के तौर पर इसमें इन्हेलर दिया जाता है। जिसमें दवा डालकर मरीज को लेनी होती है। विशेषज्ञ मरीज की स्थिति के हिसाब से उसे इन्हेलर का सुझाव देते हैं। कुछ मरीजों को अस्थमा अटैक पड़ने पर ही इन्हेलर लेना पड़ता है। वहीं समस्या गंभीर होने पर मेंटिनेंस इन्हेलर दिए जाते हैं जिन्हें रोज निश्चित समय पर लेना पड़ता है।

विशेषज्ञ की राय

अस्थमा के मरीजों को अस्थमा के कारणों जैसे परफ्यूम, प्रदूषण, पालतू जानवर, तंबाकू, सिगरेट आदि से परहेज करना चाहिए। छौंक के धुएं आदि से बचने के लिए किचेन में एग्जॉस्ट जरूर लगवाएं। एग्जॉस्ट चलाने के बाद काम की शुरुआत करें। घर से बाहर जाते समय इन्हेलर जरूर साथ रखें। सर्दी के मौसम या अचानक मौसम में परिवर्तन होने पर विशेष खयाल रखें। धुएं से पूरी तरह बचाव करें। स्मॉग के दौरान घर से निकलने से बचें। बहुत जरूरी हो तो मास्क जरूर पहनें।

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