मौत की कगार तक पहुंचा सकता है गॉल ब्लैडर स्टोन, समय रहते कराएं उपचार!

आजकल अपच, एसिडिटी, पेट में भारीपन व खाने के बाद पेट फूलना जैसी समस्याएं आम हैं। आमतौर पर इन समस्याओं को हम सामान्य मानते हैं। लेकिन अगर ये समस्या लगातार हो रही है तो इसे ज्यादा दिनों तक नजरअंदाज न करें क्योंकि ये   पित्त की थैली (Gallbladder) में स्टोन की समस्या भी हो सकती है। लापरवाही करने पर समस्या बढ़कर काफी गंभीर होकर जानलेवा भी हो सकती है। जानते हैं जयपुर के  एसएमएस अस्पताल के जनरल सर्जन डॉ. जीवन कांकरिया से गॉल ब्लैडर की पथरी (Gallstone) के रिस्क व बचाव के बारे में।

खराब लाइफस्टाइल है कारण
Gallstone के कारणों का अभी कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। सामान्यत: आजकल के खराब लाइफस्टाइल को इसका कारण माना जाता है। कुछ विशेषज्ञ मोटापा, मोटापे के बाद सर्जरी व कुछ विशेष दवाओं को भी इसका कारण मानते हैं।

लक्षण नहीं आते सामने
सामान्यत: गॉल स्टोन के लक्षण भी सामने नहीं आते हैं। आमतौर पर इस समस्या से जूझ रहे लोगों को एसिडिटी, अपच, पेट में भारीपन, पेट खराब रहने जैसी समस्याएं होती हैं। लोग इन लक्षणों को देखकर नहीं समझ पाते कि उन्हें पथरी की समस्या भी हो सकती है। लेकिन जब समस्या बढ़ जाती है तो कुछ लोगों को पेट के ऊपरी हिस्से की दायीं तरफ दर्द महसूस होता है। अधिक मात्रा में गैस की फर्मेशन हो सकता है, वोमिटिंग व पसीना आना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इसलिए लंबे समय तक पेट में बनने वाली एसिडिटी व गैस को सामान्य न लें। फौरन डॉक्टर को दिखाएं।

ज्यादा स्टोन होने पर फटने का खतरा
लापरवाही करने से कई बार पथरी पित्त की थैली यानी गॉल ब्लैडर से निकलकर पाइप लाइन में फंस जाती है। ऐसे में मरीज को पीलिया बन जाता है। पीलिया गॉल स्टोन के कारण होता है, तो उसका इलाज स्टोन निकलवाने के बाद ही संभव होता है। गॉलस्टोन निकलवाए बगैर दवाएं असर नहीं करतीं। इसके अलावा स्टोंस अगर ज्यादा हैं तो गॉल ब्लैडर फटने का भी डर रहता है।

गॉल ब्लैडर का कैंसर
गॉल ब्लैडर के स्टोन में साइज से कोई फर्क नहीं पड़ता। पथरी चाहे 2 एमएम की हो या दो सेंटीमीटर की हो, ये गॉल ब्लैडर की परत को खराब करती है। धीरे धीरे ये परत मोटी हो जाती है और ये कैंसर का रूप धारण कर लेती है।

गॉल ब्लैडर का कैंसर लाइलाज
रिसर्च में सामने आया है कि यदि पथरी तीन सेंमी. से बड़ी है और लगातार दस सालों तक पित्त की थैली में है तो इसके 99 प्रतिशत कैंसर में तब्दील होने की आशंका होती है। देश में तमाम मरीज इस मामले में लापरवाही बरतते हैं और सर्जरी नहीं कराते हैं, जिसके कारण वे गॉल ब्लैडर के कैंसर के शिकार हो जाते हैं। गॉल ब्लैडर का कैंसर लाइलाज है क्योंकि इसमें न तो सर्जरी संभव है और न ही कीमोथैरेपी या रेडियोथैरेपी हो सकती है।

दवाओं ने नहीं निकलता गॉलस्टोन, सर्जरी ही विकल्प
गॉल ब्लैडर का एक ही इलाज है, वो है सर्जरी। ये किडनी स्टोन की तरह दवाओं से नहीं निकलता। गॉलस्टोन बहुत दर्द वाली परेशानी नहीं देता, इसलिए कई लोग लंबे समय तक इसे पड़ा रहने देते हैं। इस चक्कर में बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। 

मात्र एक दिन की सर्जरी
यदि गॉल ब्लैडर में स्टोन है तो घबराएं नहीं, इसकी समय रहते सर्जरी कराएं ताकि रोग गंभीर न हो। सर्जरी के लिए मात्र एक दिन का समय चाहिए होता है क्योंकि आजकल ये दूरबीन विधि से होती है। इसमें पित्त की थैली को ही निकाल दिया जाता है। मरीज तीसरे से चौथे दिन रुटीन वर्क में आ जाता है। 

विशेषज्ञ की राय
डॉ. कांकरिया का कहना है कि जब भी कभी पेट में दर्द की समस्या हो, विशेषज्ञ की सलाह से सोनोग्राफी जरूर कराएं। इससे आपको स्टोन का पता चल जाएगा। अगर गॉल ब्लैडर में स्टोन की पुष्टि हो तो इधर उधर भागने के बजाय सर्जन के पास जाएं और सर्जरी कराएं। 

समस्या से ऐसे करें बचाव
इस समस्या से बचने के लिए गरिष्ठ व अधिक चिकनाईयुक्त भोजन से परहेज करें। बाहर  का जंकफूड और फास्टफूड खाने से बचें। फाइबरयुक्त डाइट ज्यादा खाएं। खाने से पहले सलाद खाएं। रात का खाना समय से खाएं और खाने के बाद थोड़ी देर जरूर टहलें। रोजाना व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

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