गलती से नवरात्र व्रत खंडित हो गया तो जरूरी हैं ये उपाय

नवरात्रों में नौ दिनों में व्रत रखने की परंपरा का शास्त्रों में अलौकिक स्थान है। अगर गलती से नवरात्र व्रत खंडित हो गया तो क्या करें। यह प्रश्न सभी भक्तों के मन में आता है। व्रत खंडित होना अच्छा नहीं होता है। इससे आपकी तप में बाधा आती है। व्रती को मिलने उपवास का फल कमजोर होता है। माता भगवती जगत जननी हैं उनका उदार स्वरूप अपने बच्चों को सदैव क्षमा कर देता है। किसी कारणवश गलती से व्रत भंग या टूट जाता है, तो उस धर्म संकट से बचने के कुछ उपाय शास्त्रों में वर्णित हैं। आइए उनके बारे में जानते हैंः

क्षमा याचना

व्रत खंडित या टूटने पर सबसे पहले तुरंत स्नान आदि के बाद माता भगवती से क्षमा याचना करनी चाहिए। मां का दिल बच्चों की सभी भलों को क्षमा कर सकता है। लेकिन उसके लिए माता के सामने सच्चे मन से क्षमा याचना करना जरूरी है। माता से याचना करें कि वे भूल से हुए इस अपराध को क्षमा करें और व्रत का अमिट फल देने की कृपा करें।

मूर्ति स्नान

माता की मूर्ति के आगे पूरे मन से क्षमा याचना के बाद, मूर्ति पूजन किया जाना चाहिए। इसके लिए क्षमा मंत्र को पढ़ते हुए, मूर्ति का पंचामृत स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद विधिवत श्रंगार करना चाहिए। माता की सेवा से अनेकानेक पापों की क्षमा मिल जाती है। साथ ही शुभ फलोें की प्राप्ति होती है।

हवन का आयोजन

ऐसी मान्यता है कि नवरात्रों के पावन अवसर पर किए गए हवन की हर एक आहूति सीधी देवताओं तक जाती है। गलती से नवरात्र व्रत खंडित हो गया हो तो हवन का आयोजन आपकी प्रार्थना को देवताओं तक पहंुचाता है। हवन के दौरान किया संकल्प, जिस संकल्प से आपने हवन का आयोजन किया। जरूर पूरा होता है। देवी माता का स्मरण करते हुए हवन संपूर्ण करने से व्रत का फल नाश नहीं होता।

दान का फल

किसी भी पूजा या हवन के बाद दान आदि का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार आपके द्वारा किया गया दान इस लोक के साथ-साथ परलोक में भी शुभ फल देने वाला होता है। शास्त्रों के अनुसार ब्राम्हणों को भोजन करवाना भी अनेक कष्टों को दूर करता है। जरूरतमंद को दिया गया दान आपकों पापों से छुटकारा दिला सकता है।

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