रहेगा पूरा साल सेहत भरा, अपनाएं ये कारगर उपाय

अंजनि श्रीवास्तव, सांझ संजोली पत्रिका

नए साल की शुरूआत हो चुकी है। नया साल नई उमंग व नई उर्जा ले कर आता है। हर कोई यह चाहता है कि साल के बारह महीने उसका स्वास्थ्य ठीक रहे व उसे किसी भी तरह की कोई सेहत संबंधी समस्या न हो। आपकी इसी चाहत को ध्यान में रखते हुए आज हम साल के 12 महीने अपने आप को कैसे स्वस्थ्य रखें, यह बताने जा रहे हैं। आप इन सुझावों को अमल में ला कर अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख सकते हैं। तो चलिये जानते हैं, जनवरी से लेकर दिसंबर तक कैसे रखें अपने स्वास्थ्य का ख्यालः

नवंबर-दिसंबर/जनवरी-फरवरी
सर्दियों में कई तरह की सेहत से जुड़ी समस्याओं से बचने की जरूरत होती है। अक्सर, मौसम को देखते हुए, कई लोग आलस की वजह से व्यायाम को छोड़ देते हैं। सबसे पहले यह समझने की जरूरत है कि इन दिनों व्यायाम न करना बहुत ही गलत निर्णय होता है। नियमित व्यायाम आपके वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है, आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली की ताकत को बढ़ा देता है, इसके साथ-साथ व्यायाम तनाव को कम करने में भी बेहद कारगर साबित होता है। सर्दियों में जुकाम-बुखार होने की संभावना अधिक होती है, इसलिए सुनिश्चित करें कि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली अच्छी स्थिति में रहे। इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियों व दूध-डेयरी उत्पाद जैसे पनीर, दही आदि इसके बेहतरीन स्रोत होते हैं। इसके साथ-साथ प्रोटीन, विटामिन ए और बी 12, कैल्शियम, जो हमारी हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है, आप चाहें तो कम वसा वाले दूध व दही का प्रयोग कर सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए जाड़ों में फाइबरयुक्त भोजन बहुत जरूरी होता है। फाइबरयुक्त भोजन जैसे सेब, नट्स आदि में पाए जाने वाला फाइबर प्रतिरक्षा प्रणाली को दुरूस्त रखने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। फाइबर शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने, वजन घटाने और मधुमेह के खिलाफ सुरक्षा में सहायता करता है।

पाचन तंत्र की रक्षा के लिए उच्च फाइबर आहार बहुत जरूरी होता है। साल के इस महीने कई लोग थका हुआ और सुस्त महसूस करते हैं। यह सूर्य के प्रकाश की कमी के कारण होता है, जो हमारी नींद और जागने के चक्र को बाधित करता है। इससे निपटने के लिए इन तरीकों को आजमा सकते हैंः जितना हो सके प्राकृतिक दिन के उजाले में बाहर जरूर निकलें, रात को अच्छी नींद लें, कोशिश करें कि प्रतिदिन सोने व जागने का एक ही समय निर्धारित करें और व्यायाम या योग करके अपने शरीर को चुस्त रखें।

मार्च-अपैल
सर्दियों अपनी समाप्ति पर होती हैं, इन महीनों मंे मौसम में हो रहे बदलाव की वजह से कई मौसमी बीमारियां लोगों को परेशान करती हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी सेहत का खास ख्याल रखें। इन महीनों नाक व गला बहुत सूखता है, शुष्क नाक और सूखा गला बैक्टीरिया को आकर्षित करता है। इससे बचने के लिए अपने दिन की शुरुआत एक गिलास गुनगुने पानी और आधे नींबू के रस के साथ करें। यह पाचन के लिए अच्छा है और विटामिन सी आपको बदलते मौसम में होने वाली परेशानियों से बचा सकता है। बदलते मौसम में जितना संभव हो आपको पौष्टिक भोजन ही करना चाहिए। इस मौसम में दलिया खाना आपके दिन की शुरुआत करने का एक स्वादिष्ट तरीका है। ऐसे खाद्य पदार्थ आपको ऊर्जा देते हैं। आप ओट्स भी खा सकते हैं। ओट्स में बहुत सारे महत्वपूर्ण विटामिन और खनिज भी होते हैं, जो आपके शरीर को उर्जा पहुंचाने में मदद करता है। साथ ही अपने खाने में कुछ अन्य पदार्थ जैसे कि लहसुन, खट्टे पदार्थ, सौंफ, दही, संतुलित मात्रा में लाल मिर्च, मशरूम, पत्तेदार साग, ब्लूबेरी, गाजर, आलू आदि को शामिल कर जुकाम और फ्लू जैसी मौसमी समस्याओं से बच सकते हैं।

नियमित रूप से स्नान करने से भी बदलते मौसम का सामना करने में मदद मिलती है। भोजन करने से पहले और बाद में अपने हाथों को नियमित रूप से धोएं। घर से बाहर होने पर अपने साथ हैंड सैनिटाइजर रखना एक अच्छी आदत है। अपने चेहरे को नियमित रूप से धोएं इन तरीकों को अपनाकर आप बैक्टीरिया के संक्रमण के जोखिम को कम कर सकते हैं।

मई-जून
साल के इन महीनों में उत्तर भारत में पड़ने वाली गर्मी किसी की भी सेहत बिगाड़ सकती है। इस भीषण गर्मी में बहुत पसीना, सूखापन, त्वचा की समस्याएं जैसे टैन, सन बर्न, पिंपल्स, हीट रैशेज आदि जैसी समस्याएं आपको बहुत परेशान कर सकती हैं। गर्मियों के महीनों के धधकते सूरज के साथ, आपको यह जानना जरूरी है कि अपने सेहत का ख्याल कैसे रखें। इन दिनों सबसे आम समस्या लू लगने की होती है। गर्मियों में कई बार ध्यान न देने पर शरीर अधिक गर्मी को अवशोषित कर लेता है। यह एक गंभीर स्थिति है और तत्काल चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता है। शरीर के तापमान को सामान्य रखना बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसी स्थिति में आप ठंडे पानी से स्नान कर सकते हैं साथ ही ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनकर हीट स्ट्रोक को रोक सकते हैं। इस मौसम में सही मात्रा में पानी पीना बहुत आवश्यक होता है। गर्मी के दिनों में सूरज की किरणों में जब आप सीधे सूर्य के नीचे लंबे समय तक रहते हैं तो अल्ट्रा वॉयलेंट विकिरण त्वचा को जला देता है। इसलिए अकसर विशेषज्ञ लोगों को यह सलाह देते हैं कि वे सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के दौरान अगर संभव हो तो घर के अंदर रहें जब सूरज की रोशनी चरम पर होती है। इस दौरान अपने आहार पर भी ध्यान रखें, विटामिन सी और विटामिन ए के सेवन से सनबर्न की संभावना कम हो सकती है। विटामिन सी युक्त खट्टे पदार्थ, जामुन, टमाटर और विटामिन ई से भरपूर नट्स एक आदर्श एसपीएफ भोजन होता है। इसके साथ ही आम, स्ट्रॉबेरी, पपीता जैसे फल आपको गर्मी के प्रकोप से बचने में मदद कर सकते हैं। इस मौसम में आने वाला फल आम ऐसे ही नहीं फलों का राजा कहलाता है, इसके सेवन से शरीर को पोषक तत्वों के साथ-साथ गर्मी से लड़ने की ताकत भी मिलती है।

जुलाई-अगस्त
साल के इन महीनों में देश के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला शुरू हो जाता है। लंबी गर्मियों के बाद बारिश हर किसी को पसंद आती है, लेकिन बारिश में नमी वाला मौसम कई बीमारयों को भी जन्म देता है। जैसे कि सर्दी और खांसी, मलेरिया, डेंगू, पेट का संक्रमण, दस्त, बुखार, टाइफाइड और निमोनिया कुछ ऐसी ही बीमारियां हैं जो इस मौसम में अधिकतर लोगों को परेशान करती है। ऐसे में अपने दिन की शुरुआत सुबह एक गिलास पानी से करें। आप इसमें आधा नींबू भी मिला सकते हैं क्योंकि यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मददगार होगा। विटामिन-सी से भरपूर ताजे फलों के रस का एक गिलास भी दिन के लिए एक सही शुरुआत होती है। सुनिश्चित करें कि आप हर दिन सही मात्रा में पानी पी रहे हों ताकि आपका शरीर हाइर्डेट रहे। बारिश के मौसम में भीगने का मन करता है लेकिन जरूरी है कि आप भीगने से बचें क्योकि ऐसा आपको बीमार कर सकता है। अगर कपड़े गीले हों तो जल्द ही उन्हें बदल लें क्योंकि गीले कपड़ों में सूक्ष्म बैक्टीरिया पैदा हो सकते हैं जो आपको बीमार बना सकते हैं। हमेशा खाना खाने से पहले और बाद में अपने हाथ धोने की आदत बनाएं। खासतौर पर मानसून के दौरान जब भी आप बाहर से आते हैं तो अपना हाथ धोएं। यह मच्छरों के प्रजनन के लिए सबसे उपयुक्त मौसम है। इस मौसम में डेंगू और मलेरिया जैसे बुखार मच्छरों द्वारा फैलते हैं जो ताजा और स्थिर पानी में प्रजनन करते हैं। इस मौसम में, आपको कई जगह मिलेंगी जहां बारिश का पानी जमा हुआ है। ऐसा न होने दें। इसीलिए जरूरी है कि अपने घर के आस-पास जल भराव की जांच करें। आप मच्छर से बचाने वाली क्रीम या स्प्रे का भी उपयोग कर सकते हैं। इस मौसम में अपने खान-पान पर भी विशेष ध्यान दें, स्ट्रीट फूड या बासी भोजन खाने से बचें। इस मौसम में डायरिया, हैजा और पेट में संक्रमण जैसी बीमारियां आम रहती हैं लेकिन थोड़े प्रयास से इसे रोका जा सकता है।

सितंबर-अक्टूबर
इन महीनों में आर्द्रता अपने चरम पर होती है। चाहे वह घर के अंदर हो या बाहर, बहुत अधिक तापमान के साथ बहुत अधिक नमी हमारे शरीर को गर्म कर सकती है। जब ऐसा होता है, तो परिणाम खतरनाक हो सकते हैं। उच्च आर्द्रता मानव शरीर पर कई प्रतिकूल प्रभाव डालती है। यह हमारे अंदर कम ऊर्जा और सुस्ती की भावनाओं को बढ़ाती है। इसके अलावा, उच्च आर्द्रता हाइपरथर्मिया का कारण बन सकती है। इसके साथ-साथ इस मौसम में लोगों को निर्जलीकरण, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, अधिक गंभीर परिस्थितियों में बेहोशी व हीट स्ट्रोक की समस्या हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति में हीटस्ट्रोक के लक्षण दिखें जैसे कि सिरदर्द, भ्रम या उल्टी, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। इन महीनों में त्वचा की परेशानियां भी काफी आम होती हैं। इसका कारण बैक्टीरिया और फंगस का तेजी से बढ़ना है। इन सभी परेशानियों से बचने के लिए कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं जैसे कि आप पर्याप्त मात्रा में पानी या गैर-अल्कोहल वाले तरल पदार्थों का सेवन करें, भले ही आपको प्यास न लगे। कैफीन, अल्कोहल और शर्करा युक्त पेय से बचें क्योंकि वे आपके शरीर के तरल पदार्थ को खोने का कारण बन सकते हैं। साथ व्यायाम को अपना साथी बनाएं, यह आपके शरीर को तरोताजा करने का सबसे अच्छा तरीका है। प्रतिदिन लगभग 30 मिनट के लिए व्यायाम करने से आप कई तरह की समस्याओं से बच सकते हैं। साथ ही थोड़ा समय योग करना भी आपके लिए हितकारी हो सकता है।

गाइनाकाॅलेजिस्ट व आईवीएफ विशेषज्ञ डाॅक्टर अनुभा सिंह से बातचीत पर आधारित

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