प्रेग्नेंसी के दौरान ध्यान रखें इन बातों का! Pregnancy Tips for Healthy Motherhood

गर्भ में पल रहे बच्चे का ध्यान रखना सबसे ज्यादा आवश्यक होता है, इसके लिए सबसे पहले आपको अपना सही ख्याल रखने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं किन आवश्यक बातों पर ध्यान देना आपके लिए जरूरी होता है-

मां और बच्चे, दोनों की सेहत काफी हद तक डाइट पर डिपेंड करती है। ऐसे में प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन से भरपूर चीजें ज्यादा खानी चाहिए जैसे कि दालें, पनीर, अंडा, नॉनवेज, सोयाबीन, दूध, पनीर, दही, पालक, गुड़, अनार, चना, पोहा, मुरमुरा आदि। फल और हरी पत्तेदार सब्जियां खूब खाएं। शरीर में पानी की कमी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए क्योंकि डिलिवरी के वक्त काफी खून की जरूरत पड़ती है और बच्चा भी फ्लूइड में रहता है, इसलिए नीबू पानी, नारियल पानी, छाछ, जूस खूब पिएं। बच्चे के दिमाग के विकास के लिए ओमेगा-3 और ओमेगा-6 बहुत जरूरी हैं। फिश लिवर ऑयल, ड्राइफ्रूट्स, हरी पत्तेदार सब्जियों और सरसों के तेल में ये अच्छी मात्रा में मिलते हैं।
बच्चे को वही मिलता है, जो मां खाती है इसलिए देर तक भूखी न रहें। खाने में ज्यादा अंतर से एसिडिटी हो जाती है। बेबी का साइज बढ़ने के साथ स्टमक की कैपिसिटी कम हो जाती है, इसलिए थोड़ा-थोड़ा खाएं लेकिन बार-बार खाएं। दिन में पांच बार खाना, तीन बार फ्रूट्स और दो बार दूध जरूर पिएं।

प्रेग्नेंसी के दौरान किसी खास चीज को खाने का दिल ज्यादा करने लगता है। ऐसे में किसी एक ही चीज को खाने के बजाय बाकी चीजों को भी खाने में शामिल करें और वैरायटी का ध्यान रखें। तला और मसालेदार न खाएं। इनसे गैस, एसिडिटी, जलन हो सकती है। जो भी खाएं, फ्रेश खाएं। बाहर के खाने से इंफेक्शन का खतरा होता है, जैसे ही आपको पता चलता है कि आप गर्भवती हैं, तुरंत डाक्टर से मिलें। हर अस्पताल में एंटीनेटल केयर के तहत गर्भावस्था का ख्याल रखा जाता है। वहां अपने नाम का एक कार्ड बनवाएं तथा हर 15 दिन बाद डाक्टर से अपना चेकअप करवाती रहें।

समय-समय पर आपको अपने हीमोग्लोबिन की जांच कराना भी जरूरी होता है। गर्भकाल में खून की कमी न हो, इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए अन्यथा प्रसव के समय परेशानियों का सामना करना पड सकता है। महीने की पहली तारीख को अपना वजन चेक करें। गर्भकाल में वजन बढना आम बात है। बढे हुए वजन से उच्च रक्तचाप, ह्वदयरोग, मधुमेह आदि संभव है।

सप्ताह में दो बार पेशाब की जांच करवाएं, सामान्यतया पेशाब में एल्ब्यूमिन प्रोटीन अनुपस्थित रहता है मगर गर्भकाल में कोई जटिलता होने पर पेशाब में एल्ब्यूमिन प्रोटीन आने लगता है। गर्भ काल में हार्टबर्न की समस्या आम है। इस क्रिया में पेट में जलन वाला हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जब अमाशय से निकल कर भोजन के रास्ते से होकर मुख तक पहुंचता है तो मुंह खट्टे पानी से भर जाता है। यह स्थिति गर्भकाल में अक्सर उत्पन्न हो जाती है।

कमर का दर्द आजकल की आम समस्या है लेकिन गर्भकाल में इसकी संभावना बहुत अधिक बढ जाती है। ऐसा कई बार कैल्शियम की कमी से भी होता है। शरीर को सही स्थिति में रखकर भरपूर आराम करना ही इस तकलीफ का एकमात्र इलाज है।

गर्भावस्था में पैरों की मांसपेशियों में अकडन, ऐठन होना भी सामान्य समस्या है। इसके लिए गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में कैल्शियम लेना चाहिए। मांसपेशियों की हल्की मालिश करने पर भी आराम मिलता है।

गर्भावस्था में असावधानी से होने वाली परेशानियां
गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप सबसे बडी समस्या है। रेगुलर चेकअप ही श्रेष्ठ उपाय है। उच्च रक्तचाप यदि लंबे समय तक रहे तो ह्वदय रोग, लकवा, आंखों की रोशनी चले जाने जैसी तकलीफों से गुजरना पड सकता है।
मूत्र में एल्ब्यूमिन प्रोटीन का उपस्थित होना भी इस समय की बडी परेशानी है। इससे से शरीर में सूजन तथा गुर्दो पर अकारण अनावश्यक दबाव पडता है, जिस से इन अंगों की कार्यप्रणाली भी बाधित हो सकती है। क मिर्गी के दौरे भी गर्भावस्था की परेशानियों में शामिल हैं, यदि ऐसा हो तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें।
उच्च रक्तचाप, वजन बढना, पेशाब में एल्ब्यूमिन प्रोटीन का उपस्थित होना, मिर्गी के दौरे पडना आदि परेशानियां हों तो इस स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में टॉक्सीमिया ऑफ प्रेग्नेंसी कहते हैं। इससे ग्रस्त महिला को स्थिति का पता तब चलता है जब पहनी हुई अंगूठी उंगली में कसने लगती है। गर्भकाल में होनें वाली भ्रांतियां इन दिनों गर्भवती महिलाएं अनेकानेक भ्रान्तियों का शिकार हो जाती हैं।

आइए जानते हैं क्या हैं वे भ्रातियां –
सहवास नहीं करना चाहिए – गर्भवती महिलाएं सोचती हैं कि वे गर्भकाल में सहवास नही कर सकती हैं। लेकिन ऐसा नही है आप डॉक्टर की सलाह से सहवास का पूर्ण आनन्द ले सकती हैं। परन्तु अंतिम तीन माह में इसे टालना ही ठीक रहेगा अन्यथा शिशु को हानि हो सकती है या फिर रक्तस्त्राव अधिक हो सकता है।
व्यायाम हरगिज न करें – यह भी एक भ्रांति ही है, यदि आप नियमित जांच करवा रही हैं तथा गर्भकाल के सामान्य दौर से गुजर रही हैं तो हल्के व्यायाम करने में कोई हर्ज नहीं है, जैसे पैदल चलना, तैराकी आदि। हां, प्रसव की तारीख के नजदीकी दिनों में पूरी तरह से आराम करना ही श्रेष्ठ है।
बहुत खाना चाहिए – गर्भकाल में आपको अपने साथ अपने शिशु के लिए भी भोजन करना आवश्यक होता है, पर इसका मतलब यह भी नहंी कि आप जरूरत से ज्यादा खाएं, बस, आपका आहार संतुलित होना चाहिए जिसमें सभी पोषक तत्वों का पर्याप्त मात्रा में समावेश हो।

गर्भकाल के खतरनाक लक्षण
यदि गर्भावस्था के दौरान निम्न लक्षणों से आप ग्रसित हैं तो तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें क्योंकि इन्हें नजरंदाज करना आप और आपके शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है।

– योनि मार्ग से रक्तस्त्राव होना
– चेहरे या उंगलियों पर सूजन आना
– लगातार असहनीय सिरदर्द होना
– लगातार उल्टियो का दौर
– कंपकंपी के साथ बुखार आना
– पेशाब मार्ग में रूकावट
– योनि मार्ग से तरल पदार्थ का निकलना
– पेट दर्द होना

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