ऐसे पहचानें बच्चों में मानसिक बीमारी के शुरूआती लक्षणों को! Mental Illness in Children

बच्चों में मानसिक बीमारी के चेतावनी संकेत क्या हैं?

बच्चों का मन बेहद कोमल होता है, कई बार बड़े अपनी व्यस्तता में बच्चों के मन को समझने की चाह कर भी कोशिश नहीं कर पाते हैं। बच्चों पर ध्यान नहीं देने से कम उम्र से बच्चे अवसाद या उदासी का शिकार हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समय रहते बच्चों के डिप्रेशन को पहचानना (Mental Illness in Children) जरूरी होता है, नहीं तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। कई बार छोटे-छोटे इशारे होते हैं जिन्हें देखकर माता-पिता को सतर्क हो जाना चाहिए और जल्द से जल्द विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। आज हम बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों की बात करने जा रहे हैं, जिन्हें देखकर आपको ये पता चल सकता है कि आपके बच्चे को आपकी मदद की जरूरत हैः 

बच्चों में मानसिक बीमारी के चेतावनी संकेत क्या हैं?

लगातार उदासीः दो या अधिक हफ्ते से सामाजिक संपर्क से पीछे हटना या उससे बचना बच्चों में उदासी का संकेत हो सकता है। अगर आपका बच्चा भी लोगों से मिलने या बात करने से कतराता है और ये दो या उससे अधिक हफ्ते से हो रहा है तो बिना देर किए आपको विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।

खुद को चोट पहुंचानाः अगर आपका बच्चा आपकी मौजूदगी या पीछे से खुद को चोट पहुंचाता है या खुद को चोट पहुंचाने की बात करता है तो माता-पिता को सतर्क हो जाना चाहिए। बच्चे से प्यार से बात करनी चाहिए, ऐसे में बच्चे की उदासी का कारण जानने की जरूरत होती है। कोशिश करने के बाद भी कारण समझ न आने पर आपको बिना दे किए विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

मौत या आत्महत्या की बातः बच्चे के मुंह से मौत या आत्महत्या जैसे शब्दों को सुनना एक गंभीर स्थिति की तरफ इशारा करता है। ऐसे में बिना देर किए किसी कुशल मनोचिकित्सक से राय लेना जरूरी हो जाता है।

अत्यधिक चिड़चिड़ापनः थोड़ा बहुत चिड़चिड़ापन सभी बच्चों में होता है, लेकिन अगर आपको बच्चे में अचानक अधिक चिड़चिड़ापन नजर आए तो यह बच्चे में किसी अवसाद की निशानी हो सकती है।

नियंत्रण से बाहर का व्यवहारः बच्चे अपने माता-पिता की बात मानते हैं, जोकि सामान्य बात है। लेकिन अगर आपको महसूस हो कि आपका बच्चा आपकी बात नहीं मान रहा है, और आप चाह कर भी उसे नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं तो ये इस बात की तरफ इशारा हो सकता है कि आपका बच्चा किसी मानसिक तनाव का सामना कर रहा है। ये इस बात को दर्शाता है कि बिना देर किए आपको विशेषज्ञ की सलाह की जरूरत है।

मनोदशा, व्यवहार या व्यक्तित्व में भारी बदलावः बच्चों के व्यवहार और मूड में बदलाव होते रहते हैं। लेकिन अगर आप किसी अचानक बड़े बदलाव को नोटिस करें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चहिए, और उसके पीछे का कारण जानने की कोशिश करनी चाहिए।

इन बदलावों को भी न करें नजरअंदाजः कुछ ऐसे बदलाव है जो सभी बच्चों में कभी-कभार नजर आते हैं, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत तब होती है जब ये बदलाव अचानक और लंबे समय तक बने रहते हैं। आइए जानते हैं उन बदलावों के बारे मेंः खाने की आदतों में अचानक बदलाव, अचानक वजन में कमी, बच्चे नींद में कमी, लगातार सिरदर्द या पेट में दर्द का होना, एकाग्रता में भारी गिरावट, अचानक से परीक्षाओं में गिरते नंबर, स्कूल से बचना आदि ऐसे इशारे होते हैं जिनके सामने आते ही आपको ये जान लेना चाहिए कि आपके बच्चे को आपकी बेहद जरूरत है। इसके साथ ही परेशानी का कारण समझ न आने पर बिना देर किए विशेषज्ञ की सलाह लेनी जरूरी होती है।

यह भी पढ़ेंः