पेट के आसपास बढ़ा हुआ वजन फैटी लिवर fatty liver का बन सकता है कारण! इन बातों का रखें ख्याल

फैटी लिवर के शुरूवाती चरणों में लक्षणों का पता चलना कठिन होता है। जब तक कि लीवर की बीमारी कई अन्य तरह की तकलीफें न देने लगे। आमतौर पर फैटी लिवर का पता तब लगता है जब किसी तरह की स्वास्थ्य जांच की जाती है या जब रुटीन ब्लड टेस्ट में असामान्य लिवर के लक्षण दिखाई देते हैं। अधिकतर मामलों में लिवर में फैट तब देखा जाता है जब पेट की अल्ट्रासोनोग्राफी अन्य कारणों से की जाती है, उदाहरण के लिए, पित्त की पथरी का निदान, और यकृत के बढ़ जाने पर अक्सर मरीज की शारीरिक जांच की जाती है, जिसमें यह सामने आता है।

वसायुक्त यकृत रोग फैटी लिवर का कारण क्या है?
लंबे समय से अधिक शराब पीने से फैटी लिवर हो सकता है। हालांकि, फैटी लीवर वाले अधिकांश लोगों मे ंगैर-अल्कोहल फैटी लीवर रोग होता है, जो शराब के कारण नहीं होता है। फैटी लिवर से ग्रसित लोगों में अधिकाश जिन समस्याओं को देखा जाता है, वो हैंः
उच्च रक्तचाप
बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल
टाइप 2 मधुमेह
अधिक वजन, विशेष रूप से पेट के आसपास
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस)

क्या है फैटी लिवर का उपचार

  • फैटी लिवर की समस्या सामने आने पर आपके डाॅक्टर आपको कुछ जाचों के लिए बोल सकते हैं, जिसके बाद दवाएं शुरू होती हैं। इसके साथ-साथ आपको कुछ अन्य कदम भी उठाने पड़ सकते है जैसेः
  • धीरे-धीरे शरीर के वजन को कम से कम 7-10 किलो कम करने से रोग की तीव्रता में कमी आती है।
  • वजन कम करने से पहले अपने डाॅक्टर से जरूर बात कर लें क्योकि बहुत जल्दी वजन कम करने से स्वास्थ्य खराब हो सकता है। धीरे-धीरे वजन कम करने का एक स्वस्थ तरीका संतुलित आहार और नियमित व्यायाम है।
  • जिन लोगों को एल्कोहलिक फैटी लीवर की बीमारी होती है, उन लोगों को शराब से दूरी रखने की सलाह दी जाती है। शराब का सेवन नहीं करने से लिवर को खराब होने से बचाया जा सकता है।
  • अधिक समस्या के बढ़ जाने पर आपके डाॅक्टर आपको दवाओं का स्तर बढ़ाने या सर्जरी या फिर दोनों की सलाह दे सकते हैं।
  • लिवर की विफलता की स्थिति में लिवर के प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान फैटी लिवर की बीमारी
एक अनुमान के मुताबिक लगभग 3 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में फैटी लीवर की बीमारी उभरती है। इसके लक्षणों पर गौर करके अपने डाॅक्टर को जरूर इस बारे में बताया जाना चाहिए, लक्षण जैसेः
पेट दर्द
भूख कम लगना
अत्यधिक थकान
पीलिया
जी मिचलाना
जो भी गर्भवती महिला इन लक्षणों का अनुभव कर रही है, उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा लेनी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान फैटी लीवर संभावित रूप से जीवन के लिए खतरा हो सकता है इसलिए इसका त्वरित निदान और उपचार आवश्यक होता है।

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