महिलाओं में ये समस्या नहीं है अच्छा संकेंत

जंक फूड और अधिक तैलीय पदार्थ के सेवन से दूर रहें, मासिक धर्म चक्र सही न होने पर स्त्री जीवन भर मातृत्व सुख से वंचित भी रह सकती है

मासिक धर्म महिलाओं में होने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। कई बार महिलाएं मासिक धर्म न होने पर इसे मातृत्व से जोडकर भी देखती है जोकि बिल्कुल गलत है। मासिक धर्म न होने पर जांच के बाद ही निश्चिंत होना चाहिए व उसके बाद ही इसे मातृत्व से जोडकर देखना चाहिए, क्योकि यह स्थिति किसी बीमारी की वजह से भी उत्पन्न हो सकती है। देर करने से  छोटी समस्या विकराल रूप भी धारण कर सकती है। मासिक धर्म में अनियमितता होती है तो स्त्री के शरीर में कई अन्य विकार भी उत्पन्न हो जाते हैं। इसका कारण शरीर के भीतर किसी अन्य रोग का होना भी हो सकता है। मासिक धर्म चक्र सही न होने पर स्त्री जीवन भर मातृत्व सुख से वंचित भी रह सकती है। आइए जानते है कि किन कारणो से मासिक धर्म चर्क प्रभावित हो सकता है।

महिलाओं में खून की कमी, माहवारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, मोटापे के कारण तथा मानसिक दबाव से भी मासिक धर्म रूक सकता है। डाॅक्टर शोभा गुप्ता मेडिकल डायरेक्टर व आईवीएफ एक्सपर्ट मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर ने बताया कि अनियमित मासिक धर्म से बचना है तो पहले मोटापे को कम करें। जंक फूड और अधिक तैलीय पदार्थ के सेवन से दूर रहें। नियमित रूप से जरूरी एक्सरसाइज करें। वजन बढने से भी स्त्री रोग संबंधी बीमारियां बढने लगती हंै। 

आपकी दिनचर्या में आने वाला बडा बदलाव

क्या आपने नई नौकरी ज्वाइन की है, क्या आपने अपने उठने के समय में बडा बदलाव किया है, क्या आप छुट्टी पर कहीं गई हुई हैं? आपके शरीर को अपनी नियमित दिनचर्या में बदलाव को समायोजित करने के लिए थोड़ा समय लग सकता है और यह परिवर्तन आपके मासिक धर्म को प्रभावित कर सकते है, अधिकतर मामलों में जब आपको इस बदलाव की आदत पड जाती है तो आपका मासिक धर्म सामान्य हो जाता है, और अगर नहीं हो तो किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर मिलें। 

तनाव

नई दिल्ली स्थित शांता आईवीएफ सेंटर की गाइनाकाॅलोजिस्ट और इंफर्टिलिटी विशेषज्ञ डाॅक्टर अनुभा सिंह बताती है कि अपनी भावनाएं, विशेष रूप से तनाव, अपके मासिक धर्म चक्र की नियमितता पर एक बड़ा प्रभाव डाल सकता है। और अगर आप मासिक धर्म के समय पर न आने से तनाव में हों तो यह तनाव आपके मासिक धर्म चक्र को बुरी तरह प्रभावित करता है। तनाव लेने से स्ट्रेस हार्मोन के ऊपर सीधा असर पड़ता है जो कि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन (दो सेक्स हार्मोन) की शरीर से ज्यादा या कम उत्पत्ती के लिये जिम्मेदार होता है। अगर खून की धारा में स्ट्रेस हार्मोन बढ जाता है तो आपकी साइकिल पर असर पडेगा इसलिए ऐसी स्थिति में मन को शांत रखना जरूरी होता है व किसी विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक हो जाती है। 

 पीसीओएस

ओवरी में सिस्ट और उसके कारण सही समय पर पीरियड्स का न आना पीसीओएस कहलाता है। डाॅक्टर शोभा गुप्ता बताती है कि हार्मोन में जरा सा भी बदलाव मासिक धर्म चक्र पर तुरंत असर डालता है। चेहरे पर बाल उग आना, मुंहासे होना, पिगमेंटेशन, अनियमित रूप से माहवारी आना, यौन इच्छा में अचानक कमी आ जाना, गर्भधारण में मुश्किल होना, आदि कुछ ऐसे लक्षण हैं।

मेनोपॉज 

जब महिला अपनी 40 या 50 की उम्र में होती है तब उसके हार्मोन लेवल में परिवर्तन आने लगता है, जिससे पता चलता है कि उसके पीरियड्स अब हमेशा के लिये बंद हो जाएंगे।

बीमारी

यदि आप अभी-अभी किसी लंबी बीमारी से उबरी हैं तो बहुत कुछ संभव है कि मासिक धर्म चक्र नियमित होने में कुछ समय लगे, बीमारी की वजह से आपको दवाइयां लेनी पड़ी थीं तो, भी आपके पीरियड्स कुछ दिनों के लिये टल सकते हैं। ऐसा इसलिये क्योंकि कुछ दवाइयां एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के लेवर पर असर डालती हैं। किसी स्त्री रोग विशेषज से परामर्श अवश्य लें।

दवाएं

कोई नई दवा शुरू करने से या मौजूदा दवा की खुराक बदलने से भी आपके मासिक धर्म न होने या अनियमित होने का खतरा रहता है। इसीलिए जब भी आप किसी विशेषज्ञ से परामर्श के लिए जाएं अपने उन दवाओं का विश्लषण जरूर करें जो आप उन दिनों ले रही हों। 

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वजन
डाॅक्टर अनुभा सिंह बताती है कि आपके वजन में एक बड़ा परिवर्तन – या तो बहुत ज्यादा बढा हो या कम हुआ हो – आपके माहवारी चक्र को प्रभावित कर सकता है। बहुत अधिक मोटे या बहुत कम वजन की महिलाओं का मासिक धर्म चक्र बुरी तरह प्रभावित होता है। इसीलिए अपने वजन को नियंत्रण में रख कर आप इस समस्या को होने से पहले ही रोक सकती हैं। 
जरूरत से ज्यादा कसरत 

आवश्यकता से अधिक शारीरिक कसरत भी मासिक धर्म के चक्र में अनियमितता ला सकती है। माहावारी करवाने के लिये हमारे शरीर को शक्ति चाहिये और अगर इसी शक्ति को आप जिम में जा कर बर्न कर देती हैं, तो शरीर के पास महीने के इन दिनों में कुछ भी यूज करने के लिये नहीं रहेगा। अचानक वजन कम होना या बढ़ना हार्मोन में परिवर्तन कर देता है। इसीलिए सभी विशेषज्ञ किसी अच्छे जिम ट्रेनर के सलाह से कसरत करने की राय देते है। बिना किसी सलाह के अत्यधिक व्यायाम करने वाली महिलाओं में ऐसी समस्या देखी गई है।

सलाह 

डाॅक्टर शोभा गुप्ता ने बताया कि जीवन-शैली को नियंत्रित कर व कुछ जरूरी बातों का ध्यान रख कर इस समस्या को रोका जा सकता है –

  • मोटापे को न बढने दें यह बीमारी की मुख्य बजह है
  • रोजाना व्यायाम करें
  • अत्यधिक तैलीयए मीठाए व वसा युक्त भोजन न खाएं
  • तनाव रहित रहें
  • सही समय पर खाना चाहिए, डाइट में संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों को शामिल करें
  • पूरी नींद ले