किडनी कैंसर: पहचानें शुरूआती लक्षणों को

कई बीमारियां आम तौर पर इसलिए जानलेवा साबित होती हैं, क्योंकि उनके बारे में मौजूद आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूकता कम है। अगर समय पर ध्यान दिया जाए तो गुर्दे के कैंसर से भी पूरी तरह मुक्ति पाई जा सकती है। इस स्टोरी को पढने के बाद आप जरूर जागरूक महसूस करेंगे।

गुर्दा के कैंसर में गुर्दे की कोशिकाओं की एक असामान्य वृद्धि होती है, जो वास्तव में गुर्दे ऊतक में एक ट्यूमर बन जाता है। गुर्दे के कैंसर के विभिन्न प्रकार हैं, जिनमें से सबसे साधारण बच्चों में विल्म ट्यूमर और वयस्कों में गुर्दे के सेल का कार्सिनोमा (हाईपरनेफ्रोमा भी कहा जाता है) होना होता है।
कैंसर रोग विशषज्ञ डाॅक्टर विकास गोस्वामी ने बताया अक्सर मूत्र के साथ खून आना या मूत्र का रंग रतुआ या गाढ़ा लाल है। यदि आप के पेट में दोनों तरफ लगातार टीस के साथ दर्द हो रहा है, तो आपको बिना देरी किये अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि यह आपके शरीर में छिपा हुआ कैंसर हो सकता है, जो कि खतरनाक ढंग से आपके गुर्दों को अपनी चपेट में ले रहा हो। हल्का बुखार, लगातार वजन कम होना, लगातार थकान महसूस होना और मितली आना, ये सारे लक्षण बताते हैं कि आपके गुर्दे के साथ सब कुछ ठीक नहीं है। ऊपर बताये गए लक्षणों और पेट के दोनों तरफ गाँठ की उपस्थिति यह बताने के लिए पर्याप्त है कि आपके गुर्दे में कार्सिनजेनिक कोशिकाएं विकसित हो रही हैं, जो कि आपके स्वास्थ्य और जीवन के लिए खतरा हैं।

एक शोध के अनुसार दुनियाभर में प्रत्येक वर्ष 7 करोड़ 36 लाख लोगों की देर से डॉक्टरी परामर्श लेने के कारण पेट के कैंसर से मृत्यु होती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि पेट के कैंसर से लोगों की मृत्यु होती है, जबकि समय रहते डॉक्टर की सलाह से वे पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।

इस बारे में कैंसर रोग विशषज्ञ डाॅक्टर विकास गोस्वामी का कहना है, कि शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लिया जाना बेहद आवश्यक होता है। कई रोगी इन लक्षणों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते और इलाज में देरी हो जाती है। इलाज में ज्यादा देरी हो तो विकल्प काफी सीमित हो जाते हैं। किडनी कैंसर से बचने के लिय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक होता है जैसे –

धूम्रपान
अगर आप धूम्रपान करते हैं तो किडनी कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। धूम्रपान करने वालों में औसतन 50 प्रतिशत किडनी कैंसर होने का खतरा होता है। लेकिन अगर आपके धूम्रपान की लत बढ़ती जा रही है तो यह प्रतिशत बढ़ भी सकता है। जो लोग सिगरेट पीते हैं उनमें किडनी कैंसर की संभावना धूम्रपान नहीं करने वालों से दुगनी होती है।

अनुवांशिक कारण
कुछ लोगों में खराब जीन्स के कारण किडनी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। डीएनए में किसी भी तरह के बदलाव करने से जीन्स असमान्य ढंग से काम करने लगती है। इन कारणों से होने वाले कैंसर को अनुवांशिक कहा जाता है। वैज्ञानिक इस तरह के जीन की खोज में लगे हैं जो किडनी कैंसर की जिम्मेदार होती है जिससे भविष्य में डॉक्टरों को इस तरह के मामलों मदद मिल सके। जिन लोगों को अनुवांशिक कारणों से किडनी कैंसर होता है उनमें अक्सर दोनों किडनी में कैंसर के लक्षण पाए जाते हैं। उनकी प्रत्येक किडनी में कई ट्यूमर हो सकते हैं। अनुवांशिक कैंसर से ग्रस्त व्यक्ति अक्सर कम उम्र में ही इसके लक्षण दिखने लगते हैं

किडनी रोग
डाॅक्टर विकास गोस्वामी ने बताया जिन लोगों की किडनी फेल हो जाती है उन्हें हफ्ते में दो बार अपने ब्लड को मशीन के जरिए फिल्टर कराना पड़ता है। इस प्रक्रिया को डायलिसिस बोलते हैं। जो लोग लंबे समय तक डायलिसिस कराते हैं उनमें किडनी सिस्ट व किडनी कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। डायलिसिस का सीधा संबंध किडनी कैंसर के लक्षणों से नहीं होता है।

मोटापा
विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी कैंसर के बढ़ते मामले की एक प्रमुख वजह मोटापा है। ब्रिटेन में श्कैंसर रिसर्च यूकेश् ने जो आंकड़े प्रकाशित किए हैं, उनमें बताया गया है कि साल 2009 में किडनी कैंसर के 9000 से ज्यादा मामले सामने आए, जबकि वर्ष 1975 में इनकी संख्या महज 2300 थी। मोटापे की वजह से किडनी कैंसर का खतरा लगभग 70 प्रतिशत बढ़ जाता है।श्कैंसर रिसर्च यूकेश् का कहना है कि बहुत कम लोग इस बात को समझ पाते हैं कि वजन ज्यादा होने से भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर
हाई ब्लड प्रेशर से किडनी की समस्या भी हो सकती हैं क्योंकि किडनी हमारे शरीर से दूषित पदार्थों को बाहर निकालता है। हाई बल्ड प्रेशर के कारण किडनी की रक्त वाहिकाएं संकरी या मोटी हो जाती हैं। इस कारण से किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती है और खून में दूषित पदार्थ जमा होने लगते हैं और किडनी कैंसर के लक्षण दिखायी देने लगते हैं।

एल्कोहल का अधिक सेवन
एल्कोहल का सेवन करने वाले लोगों में किडनी कैंसर की समस्या हो सकती है। एल्कोहल की लत से किडनी की सेहत पर विपरीत असर होता है जिससे किडनी कैंसर के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। एल्कोहल ना पीने वाले लोगों में एल्कोहल पीने वाले लोगों की अपेक्षा किडनी कैंसर का खतरा कम होता है।