महिलाओं की बड़ी समस्या समय से पहले मेनोपॉज (Early menopause)

रजोनिवृत्ति का मतलब है जब आप जीवन में प्रजनन से गैर-प्रजनन चरण तक पहुंचते हैं। एक महिला के शरीर में मान कर चलें कि एन नंबर अंडों की संख्या होती है और आपके रजोनिवृत्ति की उम्र तक पहुंचने के बाद वे नष्ट हो जाते हैं। आपके गर्भवती होंने के लिए यह एग बहुत महत्वपूर्ण होता है। कम उम्र में मेनोपाॅज से एक लड़की को बहुत झटका लगता है, जब उसे पता चलता है कि वो मां नहीं बन पा रही है। जब अंडाशय 40 वर्ष की आयु से पहले सामान्य रूप से काम करना बंद कर देते हैं तो प्रारंभिक रजोनिवृत्ति के रूप में भी जाना जाता है।

शांता आईवीएफ सेंटर की स्त्री रोग व आईवीएफ विशेषज्ञ डाॅक्टर अनुभा सिंह ने बताया कि  “कई युवा महिलाओं को आज रजोनिवृत्ति का प्रारंभिक अनुभव (Early menopause) होता है। इसके साथ ही कामेच्छा का नुकसान रजोनिवृत्ति के दुष्प्रभावों में से एक है। टेस्टोस्टेरोन रजोनिवृत्ति के कुछ स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को कम करने में मदद कर सकता है। टेस्टोस्टेरोन हार्मोन महिलाओं और पुरुषों दोनों में होता है, हालांकि पुरुषों का शरीर टेस्टोस्टेरोन का अधिक मात्रा में उत्पादन करता है। महिलाओं की बात करें को उनमें, टेस्टोस्टेरोन एक आवश्यक हार्मोन है।

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प्रारंभिक रजोनिवृत्ति क्यों?
कई ऐसी चीजें हैं जो समय से पहले रजोनिवृत्ति का कारण बन सकती हैं। कभी-कभी ये चीजें आपकी जीवन शैली का परिणाम हो सकती है जैसे –

– धूम्रपान करना
– अत्यधिक शराब का सेवन
– थायराइड या ऑटो इम्यून रोग
– कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी, जैसे विकिरण के संपर्क में आने से
– जननांग में होने वाली बीमारियां
– रजोनिवृत्ति का संबंध पारिवारिक भी हो सकता है, आनुवंशिकता भी एक महत्वपूर्ण कारण है जैसे की मां या किसी अन्य पारिवारिक महिला सदस्य से

मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर की स्त्री रोग विशेषज्ञ और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ शोभा गुप्ता ने बताया कि आनुवंशिकता मेनोपाॅज में बड़ी एक भूमिका निभाती है, हालांकि हमें यह नहीं पता होता है कि वास्तव में क्या और कितना है। एक महिला के परिवार में चलने वाले कुछ जीन उसे समय से पहले रजोनिवृत्ति का शिकार बना सकते हैं। वातावरण और जीवन शैली की आवश्यकताओं के कारण आज एक महिला का शरीर बहुत सारे बदलावों से गुजर रहा है, यही कारण है कि हम युवा  महिलाओं में शुरुआती रजोनिवृत्ति के मामलों को देख रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप कम उम्र में भी बांझपन होता है। बेहतर होगा कि आप समय पर परिवार की शुरुआत करें। अगर आपको कोई मेडिकल समस्या महसूस हो तो जल्द ही अपने डॉक्टर से सलाह लें।

महिलाओं में लोअर टेस्टोस्टेरोन का क्या कारण है?
महिलाओं में कामेच्छा में कमी के कई कारण हो सकते हैं। केवल हार्मोनल परिवर्तन नहीं है जो कामेच्छा की कमी का कारण बन सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं। अत्यधिक थकान से कम हो जाता है साथ ही वजन बढ़ने के कारण व मनोवैज्ञानिक कारकों द्वारा भी कामेच्छा में कमी आ सकती है। इसके साथ-साथ उम्र बढ़ने से, कुछ दवाएं, बीमारी, तनाव या अवसाद जैसे मनोवैज्ञानिक मुद्दे भी महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन के नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं।

जेपी अस्पताल और क्लाउडनाइन अस्पताल नोएडा की सीनियर कंसल्टेंट आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ श्वेता गोस्वामी ने बताया कि “दुर्भाग्य से, कोई भी ऐसी गोली महिलाओं या पुरुषों के लिए नहीं बनी कि जिसे खाएं और बस, अपनी समस्याओं के बारे में भूल जाएं और अपने सामान्य यौन जीवन को प्राप्त कर सकें। इसीलिए, अच्छा उपचार समस्या की पहचान करने और उसका सही इलाज करने पर निर्भर करता है। यदि रोगी मधुमेह या रक्तचाप जैसे किसी भी बीमारी से पीड़ित है, तो पहले इसका इलाज किया जाना चाहिए। अगर किसी दवा के कारण ऐसा हो तो इसे बदलना होगा, जरूरी है कि अपने चिकित्सक से अपनी सही जानकारियां शेयर करें ताकि सही इलाज हो पाए।”

स्वस्थ रहकर रजोनिवृत्ति चरण पर काबू पाएं
रजोनिवृत्ति सामान्य रूप से 44 साल बाद होती है। रजोनिवृत्ति की ओर बढ़ने के साथ हर महिला को अपने जीवन पैटर्न को बदलने की जरूरत होती है। अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए इन सबसे आवश्यक सुझावों का पालन करें-

– सोया को अपने आहार में शामिल करें, सोया में फाइटोएस्ट्रोजेन होता है। सोया का सबसे अच्छा स्रोत टोफू, सोया पाउडर सोयामिल्क और सोया नट्स जैसे खाद्य पदार्थ हैं।

– व्यायाम- एक सक्रिय जीवन शैली आपके समयपूर्व रजोनिवृत्ति के जोखिम को कम कर सकती है। एक सप्ताह में 3 बार एरोबिक व्यायाम के 30 मिनट फायदेमंद हो सकते हैं।

– एक अच्छा मल्टीविटामिन- सुनिश्चित करें कि आपके शरीर को विटामिन डी, विटामिन ई, जस्ता और मैग्नीशियम की पर्याप्त आपूर्ति प्राप्त होती हो।

– ऐसे खाद्य पदार्थ खाएं जो कैल्शियम से भरपूर हों जैसे कि पनीर, बादाम, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दूध, गरिष्ठ अनाज जैसे मकई के फ्लेक्स, किशमिश चोकर आदि।

– पर्याप्त नींद लें

– तनाव को कम करने का अभ्यास करें

– शराब का सेवन न करें

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