पेशाब के दौरान जलन और दर्द ये हो सकते हैं कारण

क्या आपको भी पेशाब के दौरान जलन और दर्द का एहसास होता है? अगर हां, तो आप ये जान लीजिए कि आप अकेले नहीं हैं। लेकिन इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह एक बहुत बड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है। यूरिन पास करने के दौरान जलन और दर्द होना यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, यूटीआई की तरफ एक इशारा हो सकता है। ये यूटीआई किसी आंतरिक संक्रमण की वजह से भी हो सकता है। इसके साथ ही यह यूरिनरी ट्रैक्ट में सूजन के कारण भी हो सकता है।

दरअसल मूत्रमार्ग, मूत्राशय, मूत्रवाहिनी और गुर्दे आपके मूत्र पथ का निर्माण करते हैं। मूत्रवाहिनी नलिकाएं होती हैं जो मूत्र को गुर्दे से मूत्राशय तक ले जाती हैं। हनमें से किसी भी अंग में सूजन से पेशाब के दौरान दर्द या जलन हो सकती है। जो महिलाएं गर्भवती हैं या रजोनिवृत्त हैं उन्हें भी मूत्र पथ के संक्रमण का खतरा अधिक होता है।

यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई)

अगर आपको यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) हो गया है तो आपको जलन और दर्द का अनुभव हो सकता है। कुछ एसटीआई जो दर्दनाक पेशाब का कारण बन सकते हैं उनमें जननांग दाद और क्लैमाइडिया आदि शामिल हैं। एसटीआई के लिए जांच करवाना जरूरी है, खासकर क्योंकि उनके लक्षण हमेशा नहीं होते हैं।

प्रोस्टेटाइटिस

प्रोस्टेट वाले लोगों को प्रोस्टेटाइटिस के कारण पेशाब के दौरान जलन और दर्द का अनुभव हो सकता है। यह स्थिति दरअसल प्रोस्टेट ग्रंथि की सूजन है। यह पेशाब में जलन, चुभन और बेचौनी का मुख्य कारण है।

सिस्टाइटिस

पेशाब के दौरान दर्द और जलन का एक अन्य कारण सिस्टिटिस की सूजन है। इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (आईसी) को दर्दनाक मूत्राशय सिंड्रोम के रूप में भी जाना जाता है। यह सिस्टिटिस का सबसे आम प्रकार है। आईसी के लक्षणों में मूत्राशय और श्रोणि क्षेत्र में दर्द आदि शामिल है।

एपिडीडिमाइटिस

पेशाब के दौरान जलन और दर्द का एक कारण एपिडीडिमिस की सूजन भी हो सकती है। एपिडीडिमिस अंडकोष के पीछे स्थित होता है। इसका मुख्य काम शुक्राणुओं को स्टोर और स्थानांतरित करना होता है।

पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी)

पीआईडी फैलोपियन ट्यूब, अंडाशय, गर्भाशय ग्रीवा और गर्भाशय को प्रभावित कर सकता है। यह अन्य लक्षणों के अलावा पेट में दर्द, दर्दनाक सेक्स और दर्दनाक पेशाब का कारण बन सकता है। पीआईडी एक गंभीर संक्रमण है जो आमतौर पर योनि में एक प्रारंभिक जीवाणु संक्रमण के कारण होता है जो फिर प्रजनन अंगों में चला जाता है। इसका सही समय पर इलाज किया जाना जरूरी है।