शादी से पहले परिवारों के बीच अटूट रिश्तों के लिए ये “रस्म” है जरूरी!

हमारे देश में शादी त्योहार की तरह होती है। शादी से पहले और शादी के बाद बहुत सारी रस्मों को पूरे मन और उत्साह से निभाया जाता है। आज हम आपको शादी से पहले निभाई जाने वाली बहुत जरूरी रसम मिलनी के बारे में बताने जा रहे है। मिलनी रस्म खास तौर पर बारात के द्वार पर आने के समय ही निभाई जाती है। चलिए जानते हैं इस रस्म के बारे में।

मिलनी – क्या है महत्व

मिलनी रस्म में दुल्हन के परिवार के पुरुषों द्वारा दूल्हे का स्वागत किया जाता है। वे एक दूसरे के साथ फूलों की माला का आदान-प्रदान करते हैं। वे दूल्हे को कपड़े और नकदी भी उपहार में देते हैं जो दोनों परिवारों के बीच नए अटूट संबंध के शुरूआत का संकेत है। मिलनी परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है। इस रस्म में दुल्हन पक्ष के सबसे बुजुर्ग पुरुष सबसे पहले दूल्हे को बधाई देते हैं। मिलनी सेरेमनी का यह चरण दूल्हे को सम्मानित करने के अलावा मेहमानों को एक-दूसरे से परिचित कराने का भी होता है।

दोनो परिवारों में होंगे अटूअ संबंध

इस छोटे से रिवाज का चलन पूरे भारत में देखने को मिलता है। खासकर उत्तर भारत में मिलनी संस्कार बेहद अधिक महत्व रखता है। मिलनी समारोह सबसे महत्वपूर्ण समारोह है क्योंकि इसमें दोनों परिवारों के पिताओं का मिलन शामिल है। वरमाला मिलनी के ठीक बाद आती है। मिलनी अपेक्षाकृत संक्षिप्त है। दरअसल मिलनी ही ऐसा समारोह होता है, जिसमें दूल्हे पक्ष के पूरे परिवार का आमने-सामने स्वागत हो रहा होता है। इस समारोह को गंभीरता से लेना आने वाले समय में दूल्हे-दुल्हन के पारिवारिक संभध को मजबूत करता है।

समारोह

इस समारोह के नाम से ही अधिकतर अर्थ जाहिर हो जाता है। मिलन एक संस्कृत भाषा का शब्द है। संस्कृत में, इसका अर्थ है एक दूसरे के रूबरू आना। मिलनी सेरेमनी मुख्य रूप से हिंदू शादियों का एक हिस्सा है। यह शादी की रस्में शुरू होने से पहले आयोजित की जाती है। खासकर जब बारात द्वार पर आती है ठीक तभी। एक बार जब दूल्हा बारात लेकर आ जाता है। इसी दौरान पड़ित जी द्वारा मंत्रों के उच्चारण के बीच दूल्हे और सभी बारातियों का स्वागत होता है। दुल्हन के करीबी रिश्तेदारों द्वारा सभी का स्वागत किया जाता है। इसी समय उसे शगुन, सौभाग्य के प्रतीक के रूप में गुलाब जल और गेंदे या गुलाब की पंखुड़ियों से आशीर्वाद दिया जाता हैं।