श्राद्ध पक्ष में कौओं को भोजन करना क्यों है जरूरी

श्राद्ध पूजा सही प्रकार से करना बहुत जरूरी होता है। पूजा तभी संपंन मानी जाती है जब श्राद्ध पक्ष में कौओं को भोजन कराया जाता है। शास्त्रों के अनुसार पितरों को प्रसंन्न करने और दोषों से मुक्ति के लिए श्राद्ध पूजा का विशेष महत्व है। कौओं को श्राद्ध पूजा के दौरान दिया गया भोजन सीथा पितरों को प्राप्त होता है। इस मान्यता के पीछे एक पौराणिक कथा बताई जाती है। आइए उसी पुण्य कथा के बारे में जानते हैं।

कौओं को भोजन क्यों

श्राद्ध पक्ष में कौओं को भोग जरूर चढ़ाना चाहिए। पौराणिक मान्यता के अनुसार शास्त्रों में कौओं को देवताओं का बेटा माना गया है। इसकी कथा कुछ इस प्रकार है। एक बार प्रभू श्रीराम व सीता माता वनवास के दौरान वन में बैठे हुए थे। एकाएक देवराज इंद्र के पुत्र जयंत ने कौए के रूप में आकर जगतजननी सीता माता को घायल कर दिया। प्रभू श्री राम ने तुरंत पास पड़े तिनके को मंत्र शक्ति से बाण बना कर उस दुष्ट कौए की आंख फोड दी। प्रभू श्री राम का क्रोध देखकर कौए रूपी जयंत भय से कांप गया।

वह तुरंत ही प्रभू श्रीराम की शरण में आ गया और अपने किए की क्षमा मांगने लगा। अपनी शरण में आया देख प्रभू श्रीराम ने उसकी क्षमा याचना को स्वीकार किया। और उसे यह वरदान दिया कि तुम्हें चढ़या गया भोग अनंत कालों तक भोजन के रूप में पितरों को मिलेगा। उसी के बाद से ही श्राद्ध पक्ष के दौरान कौओं को भोग चढ़ाने की व्यवस्था प्रारंभ की गई।

शनिदेव का वाहन

कौओं को शनिदेव का वाहन माना जाता है। इस वजह से भी कोओं को भोजन कराने से शनि देव का कुप्रभाव कम होता है। शनि की ढैय्या व साढ़े साती से परेशान जातक को कोओं को भोजन कराने से लाभ होता है। इसके साथ ही श्राद्ध पक्ष के दौरान पंच ग्रास का भी बहुत अधिक महत्व है। इसमें गाय, चींटी, कुत्ता, कौआ और अतिथि का भोग जरूर अलग से निकालना चाहिए। ऐसा करने से विशेष पुन्य की प्राप्ति होती है।

श्राद्ध पूजा में पीपल के पेड़ की महिमा

पुराणों के अनुसार पीपल के पेड़ में सभी देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पीपल में पितरों का भी निवास होता है। पितृ दोष से पीड़ित जातक के लिए पीपल के पेड़ की पूजा शुभ फलों को देने वाली होती है। पितरों को स्मरण करते हुए विधिवत पूजा-अर्चना के बाद पीपल वृक्ष की तीन परिक्रमाएं कई दोषों को समाप्त करने की शक्ति रखती हैं।

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