नैक रिंकल्स से राहत पाने के कुछ आसान से टिप्स

आईएलएएमईडी के संस्थापक, डर्मेटोलॉजिस्ट और एस्थेटिक फिजिशियन डॉ. अजय राणा से प्राप्त जानकारी के आधार पर

रिंकल्स उम्र बढ़ने का एक स्वाभाविक हिस्सा होती है। रिंकल्स या झुर्रियां स्किन के ऐसे हिस्सों पर पर ज्यादा दिखती हैं जो हिस्सा सूरज के संपर्क में अधिक होता है, जैसे कि चेहरा, गर्दन, हाथ और फोरआर्म्स आदि। स्मोकिंग या लंबे समय तक यूवी किरणों के संपर्क में आने से यह स्थितियां और भी अधिक कष्टकारी हो जाती हैं। गर्दन की स्किन पतली होती है और जब हम धूप को देख कर मुंह घुमा लेते हैं तो गर्दन हमेशा यूवी रेज का सामना कर रही होती है। जिसके कारण, यह बॉडी के अन्य हिस्सों की तुलना में जल्द ही उम्र बढ़ने के संकेत दिखाने लगती है। डर्मिस, गर्दन के हिस्से की लेयर जिसमें कोलेजन होती है, वह बहुत ज्यादा पतली होती है, जिससे बॉडी के अन्य हिस्सों की तुलना में उम्र बढ़ने पर रिंकल्स होने के चांसेस बहुत ज्यादा होते है।

कई टेक्नोलॉजीज हैं जो अब इन गर्दन के रिंकल्स से छुटकारा पाने के लिए उपयोग की जाती हैं। गर्दन की स्किन को कम, कम झुर्रियों वाली, और पतली दिखने में मदद करने के लिए फ्रेडेटेड सीओ 2 लेज़र खूबसूरती से काम करते हैं। रिंकल्स हमारे स्किन पर पतली रेखाएँ होती हैं और स्किन के किसी भी हिस्से में बन जाती हैं। कुछ रिंकल्स इतने हार्ड हो जाते हैं और विशेष रूप से आंखों, मुंह और गर्दन के आसपास सबसे ज्यादा नज़र आते हैं। जैसे-जैसे हमारी स्किन पुरानी होती जाती है, यह स्वाभाविक रूप से कम इलास्टिक और अधिक नाजुक हो जाती है। इसके कारण स्किन में नेचुरल आयल का उत्पादन कम होने से स्किन ड्राई हो जाती है और अधिक रिंकल्स दिखने लगती है। यूवी रेज़ नेचुरल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को गति देता है, यह स्किन के शुरुआती रिंकल्स की सबसे बड़ी वजह है। यूवी रेज़ के लगातार संपर्क से कोलेजन और इलास्टिन फाइबर जैसे स्किन के कनेक्टिव टिश्यू जो स्किन की गहरी लेयर में होते हैं, वह टूट जाते हैं, ।

उम्र के साथ स्किन कमजोर हो जाती है और गर्दन की स्किन पतली और ढीली हो जाती है, और रिंकल्स जमा हो जाती हैं। बॉडी की नेचुरल उम्र बढ़ना और जेनेटिक प्रोब्लेम्स सबसे मुख्य कारण है, जो गर्दन में रिंकल्स की उपस्थिति को तेज करते हैं। गर्दन की स्किन में पतलेपन होते हैं जो सूरज के अन्य एफ्फेक्ट्स और एनवायर्नमेंटल कारणों के प्रति अधिक सेंसिटिव होते हैं जो स्किन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। कई बुरी आदतें हमारी स्किन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। स्मोकिंग स्किन की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करता है जो नेचुरल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से पहले रिंकल्स को बढ़ाता है और मौजूदा रिंकल्स को गहरा करता है। यह स्किन को डीहाइड्रेट करता है और जो स्किन सेल्स बॉडी को हेल्दी रखते है, उस सामान्य सेल फार्मेशन को धीमा करता है ।

ये आदतें स्किन की न्यूट्रिएंट्स और ऑक्सीजन की सप्लाई को रोकता हैं, जिसके लिए इसे ब्लड वेसल्स की जरुरत होती है और यह ऑक्सीजन सप्लाई को नैरो कर देती है। स्मोकिंग स्किन में विटामिन ए की सप्लाई को रोकता है, जो स्किन की पुरानी स्किन सेल्स को बहा देने और नए सेल्स पैदा करने से रोकता है। दोनों आदतें स्किन की फ्लेक्सीबिलटी और कोलेजन के पैदा होने को नुकसान पहुंचाती हैं, जो पतली और रिंकल्स वाली स्किन के निर्माण में मदद करती हैं, खासकर नैक के हिस्सों में ।

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नैक रिंकल्स से छुटकारा पाने के लिए कुछ आसान से टिप्स:

अपने चेहरे को साफ करते समय, गर्दन की भी सफाई करें। यह गर्दन की गंदगी, विषाक्त पदार्थों को हटाने में मदद करता है।

  • साबुन का उपयोग करने से बचें, क्योंकि यह त्वचा के पीएच संतुलन को बदल सकता है। साबुन की बजाय एक सौम्य, क्रीमी क्लीन्ज़र का उपयोग करें।
  • नैक को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाएं और सनस्क्रीन को गर्दन तक लगाएं।
  • सप्ताह में एक बार अपनी गर्दन को एक्सफोलिएट करने पर काम करें। यह डेड स्किन सेल्स को हटाता है और स्किन को फ्रेश रखता है ।
  • स्किन को हमेशा हाइड्रेट रखें ताकि रिंकल्स कम दिखाई दें, और यह क्रीज को बनने से रोकने में भी मदद करता है ।
  • नैक रिंकल्स को कम करने के लिए बोटुलिनम टोक्सिन इंजेक्शंस और एस्थेटिक सर्जेरी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • विटामिन सी के साथ रेटिनॉल-आधारित गर्दन क्रीम और सीरम का उपयोग करें। यह एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करते हैं और कोलेजन कारक को बढ़ाते हुए यूवी रेज़ से होने वाले प्रभाव से बचाते हैं।

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