तनाव की वजह से महिलाएं सामना कर रही हैं इस बड़ी समस्या का भी!

महिलाओं में स्ट्रेस कई तरह की संमस्याओं को पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव की वजह से पीरियड्स अनियमित होनें के कई मामले सामने आते हैं। विश्वव्यापी महामारी के चलते कुछ महिलाओं में काफी अधिक तनाव नजर आ रहा है और इसकी सीधा असर उनके पीरियड्स पर पड़ रहा है! पीरियड्स में महिलाओं को न सिर्फ असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है बल्कि इस समय शरीर में कई तरह के बदलाव भी नजर आते हैं! यह हर महीने एक तय समय पर होता है लेकिन अगर किसी कारणवश यह समय पर न हो या फिर काफी देरी से हो, तो महिलाएं परेशान हो जाती हैं! ऐसा जरूरी नहीं है कि पीरियड्स के समय पर न आने या मिस हो जाने के पीछे सिर्फ प्रेग्नेंसी ही कारण हो! कई बार स्ट्रेस के कारण भी ऐसा हो सकता है।

तनाव की वजह से महिलाओं को हो रही समस्या के बारे में सांझ संजोली पत्रिका ने शांता फर्टिलिटी सेंटर की स्त्री रोग व आईवीएफ विशेषज्ञ डाॅक्टर अनुभा सिंह से बात की

डाॅक्टर अनुभा सिंह ने बताया कि कई महिलाओं में कोरोना महामारी के चलते भी कुछ महिलाओं में तनाव नजर आ रहा है और इसकी सीधा असर उनके पीरियड्स पर पड़ सकता है।

महिलाओं में स्ट्रेस

दरअसल कई महिलाओं में स्ट्रेस की समस्या नजर आ रही है जिसका असर उनके पीरियड्स पर पड़ रहा है. डॉक्टरों की मानें तो लंबे समय तक घरों में बंद रहने की वजह से नींद, खान-पान, फिजीकल एक्टिविटी रूटीन जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं। घर से बाहर न निकल पाने की वजह से स्ट्रेस की समस्या होने लगती है। दुनिया के ज्यादातर देशों में कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन जारी है और ऐसे में विश्वभर की महिलाओं में एक नई समस्या देखी जा रही है और वो है अनियमित पीरियड्स, ज्यादा दर्दनाक पीरियड्स और मेंस्ट्रूयल क्रैम्प्स!

महिलाओं में अनियमित पीरियड्स की समस्या

अधिक तनाव की वजह से पीरियड्स के समय ज्यादातर महिलाओं को असहनीय दर्द हो रहा है। पेट में ऐंठन और सिरदर्द की समस्या भी देखी जा रही है। डाॅक्टर अनुभा सिंह ने बताया कि कई पेशेंट्स ने फोन पर हमें सूचित किया की उनके पीरियड्स अनियमित हो गए है उनसे बात करने पर पता चला की वे काफी तनाव महसूस कर यही है। इसका सबसे कारण है कि कोविड 19 लॉकडाउन ने उनके डेली रूटीन को बिगाड़ दिया है। महामारी के चलते महिलाओं में स्ट्रेस की समस्या बढ़ी है।

स्ट्रेस शरीर द्वारा उत्पादित कोर्टिसोल की मात्रा को प्रभावित करता है। जो महिलाएं ज्यादा तनाव में रहती हैं उनमें से 40 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन की शिकायत होती है। हालांकि अभी तक इस बात का ठोस प्रमाण नहीं है कि तनाव के कारण ही बांझपन है। फिर भी मुद्दे को लेकर कई मनोचिकित्सक व मनोवैज्ञानिकों ने अपने-अपने तर्क दिए हैं कि जो महिलाएं तनाव और डिप्रेशन में रहती हैं उनमें यह समस्या दोगुनी हो जाती है।

लाइफस्टाइल

कई महिलाओं में लॉकडाउन में अनियमित लाइफस्टाइल के चलते स्ट्रेस की समस्या नजर आ रही है। तनाव महिलाओं में हॉर्मोनल असंतुलन और यहां तक कि पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम) पैदा करने के लिए भी जिम्मेदार है। यदि आप पीसीओएस सीमा पार कर चुकी हैं तो महामारी से प्रेरित यह तनाव आपको दूसरी तरफ धकेल सकता है. कई महिलाओं में ये पैनिक भी क्रिएट कर सकता है। महिलाएं अब घर के अंदर बंद हैं, इसलिए वह एक हेल्दी लाइफस्टाइल नहीं जी पा रही हैं. ऐसे में उनकी नींद के पैटर्न से लेकर डाइट भी प्रभावित हो रहा है। तनाव शरीर में इंसुलिन के असंतुलन को बढ़ा सकता है जो लेप्टिन हॉर्मोन का सिक्रीशन करता है. वह महिलाएं जिनका पहले 30 दिनों में ही पीरियड साइकिल होता था अब उनके साइकिल में 7-8 दिन या इससे भी अधिक की देरी हो सकती है. इसे ओलिगोमेनोरिया कहा जाता है।

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