Teachers Day Special: टीचर्स जो हमें हर दिन कुछ नया सिखाते है, टीचर्स जो अपनी परेशानियां भी अपनी हंसी में छिपाते हैंः आज का दिन उनके नाम – Happy Teachers Day

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ये कहावत है कि सीखने की कोई उर्म नहीं होती बिल्कुल ठीक ही है, अब देखिये न स्कूल-काॅलेज कोरोना वायरस की वजह से बंद हैं। ऐसे में बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज ली जा रही हैं। हम हमेशा बच्चों को ऑनलाइन क्लास की वजह से कोई प्राॅब्लम तो नहीं हो रही है, इसी पर बात करते हैं। लेकिन आज टीचर्स डे (Teachers Day) के मौके पर हम उन टीचर्स की बात करने जा रहे हैं, जिन्होंने इस नई तकनीक को बिना देर किए सीखा ही नहीं, बल्कि इसी के माध्यम से अपने छात्रों को भी शिक्षा देने में जुट गए। सामने आने वाली हर परेशानी का डटकर सामना किया, और करते भी क्यों न आखिर बच्चों के भविष्य का सवाल था। कुछ टीचर्स ने हमें बताया कि उनको हो रही प्राॅब्लम वो एक बार झेल सकते हैं लेकिन बच्चों को कोई प्राॅब्लम नहीं होनी चाहिए। क्लास में सभी बच्चों का मानसिक स्तर एक जैसा नहीं होता है, ऐसे में टीचर्स को उन बच्चों की चिंता ज्यादा होती है जिन बच्चों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। ऑनलाइन ये समस्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है, लेकिन हमेशा की तरह बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हमारे टीचर्स डटे हुए हैं। सांझ संजोली पत्रिका उन सभी टीचर्स का आभार व्यक्त करती है जो बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए इस कठिन परिस्थितियों में भी तन-मन से लगे हुए हैं। इस मुद्दे हमने देश के कई टीचर्स से बात की अधिकतर टीचर्स ने अपनी परेशानियों को छिपाते हुए बच्चों को हो रही परेशानियों पर ज्यादा बात कीः

 Experienced teacher Mukti Bajaj Kakkar
Mukti Bajaj Kakkar
Teacher

नोएडा के प्राइवेट स्कूल की एक्सपीरियंस्ड टीचर मुक्ती बजाज कक्कड़ ने बताया कि मैं जो सबसे ज्यादा मिस कर रही हूं वो है, बच्चों से इमोश्नल कनेक्ट। मेरे हिसाब से बच्चों को पढ़ाने के लिए उनसे इमोश्नल कनेक्ट का होना बहुत जरूरी है। ऑनलाइन मैं बच्चों को देख तो पाती हूं, लेकिन बच्चों से आमने-सामने जो बाउंडिंग होती है उसे बहुत मिस कर रही हूं। ऑनलाइन पढ़ाने में ऐसा लगता है, जैसे कि आप किसी दीवार से बातें कर रहें। जिन बच्चों को मैं इतने समय से पढ़ाती हूं, सामने से देखकर बता सकती हूं कि उसे चैप्टर समझ में आया है कि नहीं। लेकिन ऑनलाइन बच्चों के इमोशन को पकड़ना मुश्किल होता है। लेकिन मैं पूरी कोशिश करती हूं कि मेरे बच्चों को कभी कोई परेशानी न हो, और साथ ही मैं भगवान से यही प्रर्थना करती हूं कि जल्द से जल्द स्थितियां नार्मल हों।

प्राइवेट स्कूल के टीचर सुभाष नेगी ने बताया कि शुरूआती दिनो में हमें सबसे पहले ये देखना था कि क्या हमारे सभी स्टूडेंट्स के पास ऑनलाइन क्लास को शुरू करने से पहले जरूरत की सभी उपकरण जैसे कम्पैटबल फोन, वाई-फाई या उपयुक्त स्पीड का नेट कनेक्शन है कि नहीं। ये जरूरी नहीं है कि हर घर में खासकर दिन के समय में बच्चों के लिए अतिरिक्त मोबाइल मौजूद हो, ऐसे में उपलब्धता सुनिश्चित करना बड़ा चैलेंज था। एक और चैलेंज मेरे लिए था कि बच्चे जिस जगह बैठ कर पढ़ाई करने जा रहे हैं वहां ज्यादा डिस्टर्बेंस न हो। ऐसा होने पर बच्चों का ध्यान भटकता है। ये जरूरी था कि मुझे साफ्टवेयर की अच्छी नाॅलेज हो तभी मैं अपने बच्चों को उसकी जानकारी दे पाउंगा। जो भी हो मेरे से पहले मेरे बच्चे हैं वो खुश हैं तो मै खुश हूं। teachers day speech, teachers day quotes,

सांझ संजोली पत्रिका से बात करते हुए ऐसे ही जवाब कई टीचर्स ने दिए, अध्यापकों की ये निष्ठा देखकर एक बार फिर से दिल से उन्हें देश के भविष्य की तैयारी के लिए अनेकों शुभकामनाएं Happy Teachers Day!

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