स्कूल खोलने या ना खोलने पर क्या कह रहे हैं पेरेंट्स!

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कोरोना वायरस के खतरे की वजह से सभी स्कूल लंबे समय से बंद हैं। जिसकी वजह से अधिकतर स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे हैं। शुरूआती दिनों की बात करें तो अधिकतर पेरेंट्स को इस ऑनलाइन स्टडी को लेकर कई समस्याएं सामने आईं, लेकिन बाद में पेरेंट्स इस तरीके को लेकर सकारात्मक हो गए। 1 सितंबर 2020 के बाद से लाॅकडाउन की कई पाबंदियों में ढील मिल चुकी है, आगामी दिनों में स्कूल खोलने को लेकर चर्चा जोरों पर है। 15 अक्टूबर से केंद्र सरकार ने स्कूल खोलने की अनुमति दे दी है। कई राज्यों ने इस अनुमति के मिलने के बाद से ही स्कूल खोलने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। लेकिन कई पेरेंट्स इस कदम को सही नहीं मान रहे हैं। ऐसे में पेरेट्स की चिंता बढ़ी हुई है। कई पेरेट्स स्कूल खोलने के बाद बच्चों की वायरस से सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता में हैं। अधिकतर पेरेंट्स बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभी भी आशंका से घिरे हुए हैं। ऐसे में सांझ संजोली पत्रिका ने कई पेरेंट्स से बात करके उनके मन की बात जानने की कोशिश कीः

दिल्ली में रहने वाली कुसुम सिन्हा जिनकी बच्ची 7वीं कक्षा में पढ़ती है ने हमें बताया कि मेरे बच्ची पढ़ाई में हमेशा अच्छा करती है, उसकी टीचर भी हमेशा उसकी तरीफ करती हैं। लेकिन ऑनलाइन उसे पढ़ाई ज्यादा समझ में नहीं आती है। ऑनलाइन क्लास के बाद मुझे उसके साथ ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है। लेकिन मुझे ये सारी दिक्कतें होने के बाद भी अभी स्कूल खोलने के बारे में सोचना मुझे सही नहीं लगता है।

नोएडा में रहने वाले मुकुल कुमार ने बताया कि कारोना वायरस की अभी कोई दवा नहीं आई है, ऐसी स्थिति में सरकार को स्कूल खालने की बात सोचनी भी नहीं चाहिए। मेरा बच्चा आठवीं क्लास में पढ़ता है, बच्चों का जितना भी समझाओ लेकिन मुझे नहीं लगता कि बच्चे सावधानियों को लेकर पूरी तरह से जागरूक हो पाएंगे। छोटे बच्चे तो साफ-सफाई को लेकर भी उदासीन ही रहते हैं। ऐसे में खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा, छोटे बच्चों के स्कूल तो कोरोना वायरस की दवा आने तक बंद ही रहने चाहिए।

गीतिका शर्मा जो कि लखनऊ में रहती हैं ने बताया कि मेरा बच्चा क्लास 6 में है। वो ऑनलाइन पढ़ाई बहुत अच्छे से कर रहा है, मुझ इस बात पर गर्व है कि वो ऑनलाइन उन चीजों को बहुत आसानी से कर लेता है जिनके बारे में मुझे थोड़ी जानकारी भी नहीं है। मेरे ख्याल से अभी सरकार को स्कूल खोलने पर कोई विचार नहीं करना चाहिए। क्योकि स्कूल खुलने पर हमें अपने बच्चे को भेजना ही होगा और इस तरह बच्चे के साथ-साथ पूरा परिवार खतरे में पड़ सकता है। अभी बच्चे घरों में पढ़ाई कर रहे हैं, जिससे हम पूरी तरह निश्चिंत होकर अपने काम करते हैं। अगर बच्चा रोज स्कूल जाएगा तो हम भी हर दिन चिंता में रहेंगे।

कविता गोस्वामी की बच्ची जोकि अभी कक्षा 8वीं का छात्रा है, ने बताया कि मैं एक होममेकर हूं और मै ही अपनी बच्ची की टीचर भी हूं, मैं ही उसे घर पर पढ़ाती हूं। पहले तो मुझे ये ऑनलाइन पढ़ाई का तरीका बिल्कुल बेढंगा लगा लेकिन बाद में मै और मेरी बच्ची इसे लेकर यूजटू हो गए। कोरोना वायरस की स्थिति में यही तरीका सबसे अच्छा है, जब तक कोरोना वायरस की दवा नहीं आ जाती बच्चों के स्कूल बंद ही रहने चाहिए। मेरे पति भी घर से ही काम कर रहे हैं। जब उनके ऑफिस में काम घर से हो सकता हैं तो बच्चों के स्कूल भी ऑनलाइन चल सकत हैं। ऐसे में जब हर दिन देश में कोरोना वायरस के मामले नए रिकार्ड बना रहे हैं मैं तो अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेज पाउंगी। इसलिए मेरा तो यही सोंचना है कि अभी स्कूलों को खोलने पर कोई विचार तक नहीं किया जाना चाहिए।

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