ज़ीरो फिगर की चाहत कर सकती है मातृत्व के सुख से दूर!

( ज़ीरो फिगर ) अच्छा दिखना हर किसी की चाहत होती है, लेकिन अच्छा दिखने के लिए अपने सेहत से समझौता करना सही है। अगर दीपिका पादुकोण, करीना व अन्य फिल्मी सितारो का ज़ीरो फिगर  देखकर आप पर भी वैसा ही फिगर पाने का जुनून सवार है, तो इतना जान लीजिए कि यह फिगर वाकई आपको जीरो कर देगा। फिल्मी सितारे विशेषज्ञोें की देख-रेख में अपने खान-पान को व्यवस्थित करके ऐसा कर पाते हैं। लेकिन बिना किसी विशेषज्ञ की राय के अगर आप ऐसा करने की कोशिश करते हैं तो ये आपको महंगा पड़ सकता है।

सुन्दर और सुडौल शरीर कौन नही चाहता। पर ज़ीरो फिगर की चाहत आपको अन्दर से कमजोर बना सकती है। जी हाॅ ये जीरो फिगर पाने के चक्कर में लड़कियां अपने सेहत से हर प्रकार का समझौता करने को तैयार है। दुबला-पतला दिखने की चाह 18 से 25 साल की लड़कियों में सर्वाघिक है और अब तो ये हर उम्र की चाहत बन गयी है। यू एस में 1200 लड़कियों पर किए सर्वे में यह सामने आया है कि हर पांच में से एक लड़की जीरो फिगर पाने की जद्दोजहद में लगी है। 

ज़ीरो फिगर की चाहत

आजकल फिल्मी सितारों और माॅडल के नए लुक जीरो फिगर को देखकर बहुत सी युवतियों पर ऐसा असर हुआ कि उनमें रातों रात जीरो फिगर पाने की होड़ सी मच गई है। एक समय था जब नारी का हष्ट-पुष्ट होना उसकी सुंदरता का पैमाना माना जाता था। समय बदला और उसके साथ सुंदरता का पैमाना भी। पहले चला स्लिम-ट्रिम फिगर का फण्डा और अब आया है जीरो फिगर। अगर आप भी इसे पाने की दौड़ में शामिल हैं, तो ये जरूर जान लीजिये कि स्लिम और ज़ीरो फिगर आपको सेहत से दूर और बीमारियो के करीब करता जा रहा है। शरीर के वजन में जरूरत से ज्यादा कमी आपको मां बनने से रोक सकती है।

महिलाओं का मासिक चक्र

जानकारों ने आगाह किया है कि साइज-जीरो यानी छरहरा होने के लिए क्षमता से ज्यादा जिमिंग और डाइटिंग से महिलाओं का मासिक चक्र प्रभावित होता है। यहां तक कि इससे मासिक चक्र पूरी तरह रुक भी सकता है और इस तरह मां बनने की योग्यता खत्म हो जाती हैैैं ऐसी महिलाओं का इलाज कर भी दिया जाए तो समय से पहले डिलिवरी, बच्चे का वजन कम होना और कुपोषण की आशंका रहती है। अधिक एक्सरसाइज और डाइटिंग करने वाली महिलाएं एमिनॉरिया (असाधारण मासिक चक्र) और सेक्स की इच्छा में कमी का शिकार हो जाती हैं। ऐसा दिमाग के हार्मोनों में असर के कारण होता है। एक सीमा से ज्यादा की गई डाइटिंग का दुष्प्रभाव गर्भाशय पर पड़ता है।

स्त्री रोग विशेषज्ञ

मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅक्टर शोभा गुप्ता ने सांझ संजोली टीम से बात करते हुए बताया कि वजन घटाने के लिए गोलियां खाने वाली महिलाओं को भी बेहद सर्तक रहने की जरूरत है, यह उनके स्वास्थ्य में बहुत बुरा प्रभाव डाल सकती है। ज्यादातर गोलियों में काफी हद तक ऐसे तत्व होते हैं जैसे कि गर्भ निरोधक गोलियों में होते हैं। इससे ओवरी में अंडे बनना बंद हो जाता है। उन्होंने अपनी एक पेशंट का उदाहरण भी दिया जिसने माॅडल बनने के लिए अपना वजन घटाया था।

डाॅक्टर गुप्ता ने कहा कि हालांकि उनका मासिक चक्र चल रहा है लेकिन पिछले 3 सालों से इनमें अनियमितता आई है। पतलापन गर्भघारण में बाघक बन सकता है। अगर आप भी इस जीरो फिगर की रेस में शामिल हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि मेडिकल स्टडीज के मुताबिक जीरो फिगर के क्रेज में शामिल महिलाओं को मां बनने में तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता हैं।

शरीर और स्वास्थ्य

नगरों में रहने वाली युवतियां एवं महिलाएं ज्यादातर ऐसा कर रही हैं। ये स्लिम होने अर्थात जीरो फिगर पाने के लिए भोजन त्याग रही हैं। पानी पीकर भूखी रह रही हैं। ये ऐसा कर अपना शरीर और स्वास्थ्य दोनों को हानि पहुंचा रही हैं। शरीर को व्यक्ति की उम्र एवं उसके कार्य के अनुसार दैनिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। यह ऊर्जा एवं पौष्टिक तत्व हमें भोजन से मिलता है। स्लिम होने, जीरो फिगर पाने अविवेकपूर्ण भोजन कम करने या त्यागने से वजन व मोटापे से मुक्ति जरूर मिलती है किन्तु शरीर व स्वास्थ्य दोनों गड़बड़ा जाते हैं। \

एक अध्ययन के मुताबिक लगभग 73 प्रतिशत महिलाओं के मां न बनने का कारण उनका उपयुक्त वजन न होना था, पर जैसे ही उन्होनें एक उपयुक्त वजन पाया उनकी समस्या का समाधान हो गया। ऐसा पाया गया है कि लगभग 1 से 2 प्रतिशत महिलाएं एनोरिक्सिया नर्वोसा की समस्या से जूझ रही हैं, जो कि आखिरकर बांझपन का शिकार हो जाती हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि अधिक वजन वाली महिलाएं इसके लिए हर तरह से उपयुक्त हैं। कम वजन के साथ-साथ अधिक वजन भी इसके लिए उतना ही घातक है।

फर्टिलिटी एक्सपर्ट

मातृत्व को बढ़ावा और सहीं खान-पान पर प्रकाश डालते हुए, फर्टिलिटी एक्सपर्ट बताती हैं कि खान-पान में अनियमितता गर्भ धारण न कर पाने का मुख्य कारण है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादातर महिलाएं आज तक इस बात से अन्जान हैं कि खाने की दो अवस्थाएं एनोरेक्सिया नर्वोसा और बुलिमियां मुख्यतया गर्भ धारण में बाधाएं पैदा करती हैं। इस प्रकार यह अध्ययन सबके लिए एक मार्ग दर्शक के तौर पर कार्य कर रहा है।

डाॅक्टर शोभा गुप्ता का कहना है कि खान-पान में अनियमितता बांझपन का एक बड़ा कारण है, अगर इन पर वक्त रहते काबू नहीं पाया गया तो यह आहार और मोटापे से संबन्धित बीमारियों को बुलावा दे सकती हैं। आहार संबन्धी समस्याए सिर्फ बांझपन को ही बुलावा नहीं देती, बल्कि इससे गर्भावस्था में गर्भपात होने की सम्भावनाएं भी बढ़ जाती हैं। इसके अलावा उनका यह भी मानना है कि यदि कोई महिला एनोरेक्सिया से पीडित होने के बावजूद गर्भधारण करने में सक्षम है, तो ऐसा करना उसके लिए खतरनाक सिद्ध हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान भ्रूण का विकास मां से उपयुक्त मात्रा में पोषण ग्रहण करेगा जिससे महिला के शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। ऐसी अवस्था में खान-पान के विकार से पीडित महिलाओं को थकावट और अवसाद का अनुभव होगा या फिर वह कुपोषण का भी शिकार हो सकती हैं।

गर्भपात

इस प्रकार के विकारों से पीडित ज्यादातर महिलाए गर्भपात का शिकार होती है, और इनसे कम वजन के बच्चों को जन्म देने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में बुलिमिक्स प्रसव के अवसादों को कम करने का एक बड़ा कारण सिद्ध हुआ है। अंतरू यदि कोई भी महिला जो इटिग डिसऑर्डर से जुझ रही है तो उसे अपने मन से गर्भावस्था का ख्याल निकाल देना चाहिए जब-तक की वह पूरी तरह से स्वस्थ ना हो जाए। इसलिए जीरो फिगर को पाने से ज्यादा जरूरी सेहतमंद शरीर का होना जो आपको खुशयों के करीब और बीमारियो से दूर रखेगा।

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